कॉमरेड तपन सेन ने कहा कि आजाद भारत में पहली बार सरकार के खिलाफ रैली में किसान और मजदूर एकजुट होकर हिस्सा ले रहे हैं। सरकार सिर्फ धनी और कॉरपोरेट घरानों के हित साधने वाली नीतियां बना रही है। इसका सीधा असर गरीब मजदूरों और किसानों पर पड़ रहा है।
आशा वर्कर कमेटी अध्यक्ष रंजना नरुला ने कहा कि सच्चाई यह है कि पूरी दुनिया में महिलाओं व बच्चों की मौत सबसे अधिक हमारे यहां होती है। बीमा के नाम पर बड़ी कंपनियों को मुनाफा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का भी सरकार निजीकरण कर रही है।
यह रहीं मुख्य मांगें
. न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाए।
. महंगाई पर लगाम लगाई जाए।
. फसलों का उचित दाम दिया जाए।
. खेतिहर मजदूरों का कर्ज माफ किया जाए।
. मनरेगा में बजट कटौती बंद हो और बकाया दिया जाए।
. शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना लागू की जाए।