संयुक्त किसान मोर्चा अपने मुद्दों और सरकार के कदमों को लेकर दिल्ली में बैठक कर रहा है। यह बैठक शाम पांच बजे खत्म होगी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में किसान आंदोलन के स्थगन पर सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर चर्चा हुई है। इसके साथ ही किसानों से जुड़े हर मुद्दे और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार-विमर्श हुआ है।
विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद पहली और आंदोलन स्थगित होने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा दूसरी बैठक कर रहा है। बैठक दिल्ली में चल रही है। जोकि पांच बजे खत्म हो सकती है। इसमें किसान आंदोलन के स्थगन पर सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर चर्चा हो रही है। पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद मुल्लांपुर दाखा के गुरशरण कला भवन में आयोजित मोर्चे की पहली बैठक से 11 संगठनों ने किनारा कर लिया। बैठक में सभी 32 संगठनों को पहुंचने का संदेश भेजा गया था। उसमें से 18 संगठनों के नेता बैठक में मौजूद रहे। तीन संगठनों ने फोन पर अपनी सहमति दी।
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सूत्रों का कहना है कि मोर्चा चाहता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून की मांग वाली लड़ाई और तेज हो। हालांकि इसको लेकर क्या रणनीति बनी है, ये बैठक के बाद ही पता चलेगा। बैठक में लखीमपुर खीरी कांड पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बीकेयू पंजाब के रूलदू सिंह मानसा पहले ही कह चुके हैं कि लखीमपुर खीरी में किसानों को कार से कुचलने के मामले में सरकारी गवाहों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। मुख्य आरोपी आशीष मिश्र को जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवारों और गवाहों की जान को खतरा बढ़ गया है लेकिन सरकार मूकदर्शक बनकर एक और लखीमपुर जैसी घटना का इंतजार कर रही है। केंद्र सरकार ने बेशक तीन कृषि कानून वापस ले लिए पर अन्य सभी वादों से सरकार पीछे हटती नजर आ रही है। मामला बेशक एमएसपी का हो या फिर किसानों की कर्जमाफी का, सरकार सभी वादों से मुकरती नजर आ रही है। किसानों पर दिल्ली और दिल्ली की सीमाओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस नहीं लिए जा रहे।