कृषि क्षेत्र में सुधार की जरूरत है। हमने मैनिफेस्टो में जो बातें रखी हैं उसको सरकार ने लागू नहीं किया... सैकड़ों किसान यहां पर बैठे हैं, क्या वे नहीं समझते उनकी भलाई में क्या है? कृषि कानूनों को वापिस लीजिए। ये कानून किसान का साथ नहीं देते हैं: CPI-M के महासचिव सीताराम येचुरी
खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि एमएसपी पर एक कानून लागू करने की जरूरत है। तो फिर मोदीजी मोदीजी की बात क्यों नहीं सुनते: रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि, किसान 21 दिन से सर्दी में, लाखों की संख्या में, दिल्ली के चारों तरफ न्याय की गुहार लगा रहे हैं। मोदी सरकार अब ईस्ट इंडिया कंपनी से भी बड़ी व्यापारी कंपनी बन गई है। जो किसान की मेहनत की गंगा को मैली कर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को पैसा कमवाना चाहती है।
यूपी गेट पर 22वें दिन भी किसान डटे रहे। राकेश टिकैत ने कहा कि अब हल क्रांति होगी। हल से निकलेगा हल, बातचीत से हल नहीं निकल सका तो बंजर दिल्ली को हल से जोत देंगे। उन्होंने कहा कि कृषि कानून वापस लेने और एमएसपी पर खरीद गारंटी की मांग पर किसान डटे रहेंगे, अगर सरकार स्वामीनाथन की रिपोर्ट को भी लागू कर दे तो यह और अच्छी बात होगी। हालांकि स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करने का सरकार का दावा सरासर झूठा है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह ने शुक्रवार को नाराजगी दूर करते हुए यूपी गेट पर भाकियू के मंच को साझा किया। इसी के साथ वीएम सिंह ने अपना मंच आज से खत्म कर दिया है। गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने वीएम सिंह आंदोलन से अलग बता दिया था जिसके बाद वीएम सिंह अलग मंच बनाकर आंदोलन कर रहे थे।
कांग्रेस नेता और मुक्केबाज, विजेंद्र सिंह ने टिकरी बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन स्थल पर जमींदारा छात्र संगठन (JSO) द्वारा आयोजित लंगर में भोजन वितरित किया। उन्होंने कहा 'हम यहां अपने देश के किसानों की सेवा के लिए हैं। हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि 3 काले कानूनों के खिलाफ है।'
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि हमें 500 रुपये महीना की भीख नहीं समर्थन मूल्य का हक चाहिए। यूरिया का 5 किलो वजन घटाया जिससे किसान का नुकसान हुआ। शहद का किसान जैव परिवर्तित सरसो का विरोध कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार आगे बढ़ रही है।
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मोदी जी भंडारण हेतु ढांचे की बात कर रहे हैं। लेकिन अपील कॉरपोरेट से कर रहे हैं, इसका मतलब मोदी जी किसान को नहीं एग्री बिजनेस को बढ़ावा दे रहे हैं। खेती में निजीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। नवरत्न कंपिनयों के निजिकरण के बाद मोदी जी की निगाह अब खेती के निजीकरण पर है।
पीएम मोदी के संबोधन के बाद भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि, मोदी जी के संबोधन में सबसे बड़ा झूठ ये है कि गन्ना किसानों को 16 करोड़ की मदद की जा रही है। यह मदद नहीं शुगर मिल पर किसानों का बकाया है उसका भुगतान शुगर मिल को करना था। अगर सरकार उसको दे रही है तो शुगर मिलों को मदद मिल रही है। सरकार अगर इसे इंसेंटिव के रूप में देती तो कोई लाभ होता है।
नोएडा के दलित प्रेरणस्थल पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आज दिन में सांकेतिक फांसी लगाकर प्रदर्शन किया।
किसानों के समर्थन में पूर्व सैन्य अधिकारी किसानों को संबोधित करते कर्नल गुरुदेव सिंह
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आज मध्य प्रदेश में किसानों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री देश के किसानों के सबसे बड़े हितैषी हैं। किसानों की जिंदगी बदलने वाले तीनों कृषि कानून प्रधानमंत्री ने लागू किए।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक बार फिर केंद्र सरकार और कृषि कानूनों पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया है। आए दिन आंदोलनकारी किसानों की मौत को लेकर उन्होंने लिखा है, 'और कितने अन्नदाताओं को कुर्बानी देनी होगी? कृषि विरोधी कानून कब खत्म किए जाएंगे?'
तमिलनाडु में द्रमुक नीत विपक्षी दल केन्द्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हुए शुक्रवार को एक दिन के अनशन पर बैठे। केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान तीन सप्ताह से अधिक समय से दिल्ली से लगी सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। द्रमुक के प्रमुख एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता एम. के. स्टालिन, पार्टी की सांसद कनिमोई और विपक्षी गठबंधन के अन्य दलों के नेता शुक्रवार को यहां प्रदर्शन में शामिल हुए।
चिपको आंदोलन शुरू कर एक नई क्रांति लाने वाले नेता सुंदरलाल बहुगुणा भी किसानों के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि वह अन्नदाताओं की मांगों का समर्थन करते हैं।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव श्रवण सिंह पंढेर ने कहा कि कमेटी बनाना समस्या का हल नहीं है, पहले भी किसानों ने छोटी कमेटी बनाने से इनकार किया था। तोमर जी ने कल जो चिट्ठी लिखी है वो देश को भ्रमित करने वाली है, उसमें कुछ नया नहीं है। कुछ नया होता तो हम उस पर टिप्पणी करते।
सिंघु बॉर्डर पर किसान ठंड से बचने के लिए अधिक तम्बू की व्यवस्था कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी किसान ने कहा कि हम अपने आप को लंबे समय के लिए तैयार कर रहे हैं। क्योंकि काले कानूनों के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। यहां ठंड हो रही है, इसलिए हम और अधिक टेंट लगा रहे हैं।
किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के दयाल सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है उसमें हम यकीन नहीं रखते। अगर सरकार बातचीत करके काले कानून वापस लेती है तो ठीक, नहीं तो हम ये मोर्चा नहीं छोड़ेंगे।
सिंघु बॉर्डर पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन आज अपने 23 वें दिन में प्रवेश कर गया है। भारतीय किसान मोर्चा के दयाल सिंह कहते हैं कि पीएम मोदी को किसानों से बात करनी चाहिए और कानूनों को वापस लेना चाहिए। हम इन कानूनों के खिलाफ अपनी लड़ाई नहीं छोड़ेंगे।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यातायात को लेकर एडवाइजरी जारी की है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, झटीकरा बॉर्डर केवल दोपहिया और पैदल यात्रियों के लिए खुला है। दिल्ली से नोएडा की ओर जाने वाले चिल्ला बॉर्डर का एक कैरिज-वे यातायात के लिए खुला है, हालांकि नोएडा से दिल्ली के लिए दूसरा कैरिजवे बंद है।
केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 23वें दिन में प्रवेश कर गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। वहीं, कृषि कानूनों के खिलाफ तीन हफ्ते से जारी आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मध्यप्रदेश के किसानों के साथ संवाद करेंगे। इसी कार्यक्रम में करीब दो हजार पशु और मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएंगे।