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किरण से डरी BJP, कहीं 1998 का इतिहास न दोहरा दें नेता!

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पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में सीएम पद का उम्मीदवार बनाने के बाद भाजपा नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। पार्टी आलाकमान को डर है कि इस फैसले के खिलाफ नाराज स्थानीय नेता कहीं 1998 का इतिहास न दोहरा दें।
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इसी आशंका और भय के बीच पार्टी नेतृत्व ने नाराज नेताओं को मनाने के लिए केंद्रीय नेताओं की टीम को मैदान में उतार दिया है। इनमें राजनाथ सिंह को जहां केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन और प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को मनाने का जिम्मा दिया गया है।

वहीं, तीन अन्य केंद्रीय मंत्रियों अरुण जेटली, नितिन गडकरी और वेंकैया नायडू को भी मान मनौव्वल की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि पार्टी नेतृत्व ने वर्ष 1998 में भी अचानक स्थानीय कद्दावर नेताओं को दरकिनार कर वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को सरकार की कमान दे दी थी।
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1988 के बाद फिर नहीं बना सकी बीजेपी सरकार

कद्दावर नेताओं की नाराजगी के बीच हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी औंधे मुंह गिरी थी। आलाकमान के इस फैसले के खिलाफ तब पूर्व सीएम मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और विजय कुमार मल्होत्रा की तिकड़ी एकजुट हो गई थी।

इस तिकड़ी के असहयोग के कारण वर्ष 1993 के चुनाव में 49 सीटें जीतने वाली भाजपा 1998 के चुनाव में महज 15 सीटें ही हासिल कर पाई थी। भाजपा इसके बाद से दिल्ली की सत्ता पर फिर अब तक काबिज नहीं हो पाई है।

दिल्ली चुनाव को मोदी बनाम केजरीवाल होने देने से बचाने के लिए भले ही भाजपा नेतृत्व ने बेदी पर दांव लगाया हो, मगर उसके इस दांव से दिल्ली के स्थानीय नेताओं में भारी नाराजगी है। पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली इकाई को असंतोष थामने का निर्देश देने के साथ ही बेदी को भी नाराज नेताओं से मिलने की पहल करने का निर्देश दिया है।
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पार्टी जुटी है अपने डर पर काबू के लिए

यही कारण है कि दो दिन पहले कुछ मिनट के विलंब के कारण हर्षवर्धन से न मिलने वाली किरण बेदी के तेवर मंगलवार को बदले हुए थे। उन्होंने मंगलवार को खुद हर्षवर्धन से मुलाकात की।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक नाराज नेताओं को मनाने के लिए राजनाथ, गडकरी, नायडू और जेटली ने अलग-अलग नेताओं से सीधा संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने चुनावी रणनीति की कमान खुद संभाल ली है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक बेदी को आगे करने के बाद भाजपा को बढ़त हासिल हुई है। मगर इस कारण पार्टी के कुछ नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं। उक्त नेता का कहना था कि चूंकि मुकाबला कांटे का है, इसलिए ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाना बेहद जरूरी है।
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