शैलेष पटेल सोशल मीडिया पर नजर रखता था। फेसबुक पर करीब 20 व्हाट्सएप ग्रुप बने हुए थे। इन ग्रुप में शैलेश सक्रिय रहता था। वह इन ग्रुप पर किडनी देने वाले व किडनी लेने वालों से संपर्क करता था।
दक्षिण जिले के एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी पीड़ित को तीन से चार लाख रुपये देते थे। आगे ये किडनी लेने वाले से 25 से 30 लाख रुपये लेते थे। गिरोह में हर किसी का पैसा फिक्स था।
सभी को कुलदीप राय विश्वाकर्मा उर्फ केडी से तीन से चार लाख रुपये मिलते थे। डॉ. सोनू रोहिल्ला को दो से तीन लाख देते थे। किडनी देने वाले को बेहोश करने वाले डॉ. सौरभ मित्तल को दो लाख रुपये दिए जाते थे। किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान सहायता करने वाले लोगों को 20 से 25 हजार रुपये देते थे।