इंद्रजीत सिंह ने पूछताछ में बताया कि राणा ने मोगा में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का झंडा फहराने व तिरंगे का अपमान करने के लिए 2500 डॉलर इनाम देने की घोषणा की थी। उसने ये भी कहा था कि लालकिले व ऐतिहासिक इमारतों पर खालिस्तान का झंडा फहराने व तिरंगे का अपमान करने वाले को सवा लाख डॉलर दिए जाएंगे।
गत 11 अगस्त को इंद्रजीत, जसपाल व फिरोजपुर निवासी आकाशदीप (20) ने मोगा में उपायुक्त कार्यालय की छत पर खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का झंडा फहराने की साजिश रची। इंद्रजीत पहले जसपाल सिंह के साथ 13 अगस्त को नानक शहर गया और वहां से झंडा खरीदा। झंडे पर मार्कर से खालिस्तान लिखा। इसके बाद तीनों 14 अगस्त की सुबह दो मोटरसाइकिलों से उपायुक्त कार्यालय गए और छत पर खालिस्तान का झंडा फहराया व तिरंगे का अपमान किया। आकाशदीप ने पूरे घटनाक्रम की बाहर खड़े होकर वीडियो बनाई। इसके बाद राणा को व्हाट्सएप के जरिए पूरा घटनाक्रम बताया था। राणा ने इस वीडियो को प्रतिबंधित यूट्यूब चैनल ‘सिख फॉर जस्टिस’पर अपलोड किया था।
फरारी के दौरान हैंडलरों के संपर्क में रहे
मोगा पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज कर आकाशदीप को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि इंद्रजीत व जसपाल फरार हो गए थे। ये दोनों हैंडलरों के संपर्क में थे। उन्होंने ने ही इन्हें दिल्ली जाने को कहा और खर्चे के लिए 20 हजार रुपये इनके बैंक खाते में भेजे थे। दोनों नेपाल के जरिए पाकिस्तान फरार होना चाहते थे।
कुछ सामान बहन के घर छोड़ आया
आरोपियों ने बताया कि दिल्ली में इनको एक व्यक्ति मिलता, जो इनकी सहायता करता और खालिस्तान का झंडा व अन्य सामान देता। वह व्यक्ति कौन है, उस तक पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस कई जगह छापा मारी कर रही है। उस तक पहुंचने के लिए पुलिस को फिलहाल इनके कब्जे से कुछ नहीं मिला है। इंद्रजीत सिंह ने बताया कि वह खालिस्तान फोर्स के कई झंडे व अन्य सामान पंजाब में अपनी बहन के घर छोड़ आया था।
दिल्ली में फर्जी आईडी बनवानी थी
इंद्रजीत ने बताया है कि इनको दिल्ली में अपनी फर्जी आईडी बनवानी थी। उसकी मदद से काठमांडू, नेपाल जाते और वहां से फिर पाकिस्तान फरार होना था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार हैंडलर के कहने पर ये दिल्ली में जिस व्यक्ति से मिलते, वही उनकी फर्जी आईडी बनवाने में मदद करता।