उन्होंने अदालत से दाखिलों पर रोक न लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि अदालत के आदेश का अखिल भारतीय प्रभाव होगा और यह पांच से सात वर्ष की आयु के छात्रों के बीच विविधता पैदा करेगा। एएसजी ने अदालत को यह भी बताया कि 21 राज्यों ने कक्षा एक के लिए सिक्स-प्लस व्यवस्था को लागू किया है और चूंकि केवी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है, जिन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है। इसलिए प्रवेश आयु के संबंध में एकरूपता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
याचिकाकर्ता पांच साल की बच्ची की ओर से पेश वकील अशोक अग्रवाल ने सोमवार को दलील दी कि नीति में बदलाव के जरिए अधिकारी उसे शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के आयु मानदंड में परिवर्तन उन छात्रों के हित के लिए हानिकारक है, जिन्हें प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है। अग्रवाल ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को पहले प्री-प्राइमरी स्तर पर लागू किया जाना है और इसे सीधे कक्षा एक में प्रवेश करने वाले छात्रों पर नहीं लागू किया जा सकता है।