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दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने पिया टॉयलेट वाला पानी!

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आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली की चार समस्याओं का समाधान एक योजना के माध्यम से करेगी। योजना का बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुभारंभ किया।
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इस योजना के तहत गंदे पानी का शोधन करके पीने योग्य बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने शोधित पानी पीकर योजना को हरी झंडी दी।

दिल्ली सरकार की पहल पर दिल्ली जल बोर्ड ने गैर सरकारी संगठन सोशल अवेयरनेस नीवर अल्टरनेटिव (साना) के सहयोग से केशोपुर वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में सुजल धारा शौचालय से नल तक-प्रौद्योगिकी से रहन सहन में परिवर्तन परियोजना शुरू की है।

सिंगापुर में भी चल रही है ऐसी योजना

यहां साना ने सीवर के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए सीवेज वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया है। इस प्लांट में एक घंटे में चार हजार लीटर पानी साफ हो सकता है। बोर्ड इस पानी की घरों में आपूर्ति करेगा।

इस मौके पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि योजना काफी सस्ती है। योजना कामयाब होने पर उसे प्रत्येक कॉलोनी व गांवों में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना से चार समस्याओं का समाधान हो सकता है।

एक तो सभी जगह सीवर डालने की आवश्यकता नहीं रहेगी, वहीं गंदे पानी का शोधन करने और पेयजल संकट की समस्या दूर हो जाएगी। इसके अलावा यमुना नदी तक दूषित पानी जाने से रुक जाएगा।

कार्यक्रम में कानून मंत्री व जल बोर्ड के अध्यक्ष कपिल मिश्रा ने कहा कि गंदे पानी का शोधन कर पीने योग्य बनाने की योजना से दिल्ली सचिवालय को भी जोड़ा जाएगा। यह योजना कोलंबिया, पर्थ और सिंगापुर में कामयाबी के साथ चल रही है।
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कांग्रेसियों ने काले झंडे दिखाए

केशोपुर स्थित दिल्ली जल बोर्ड के संयंत्र पहुंचे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं का विरोध झेलना पड़ा। पूर्व सांसद महाबल मिश्रा और पार्षद अमृता धवन के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने अरविंद केजरीवाल को काले झंडे दिखाए। उन्होंने बिजली-पानी से जुड़ी समस्याओं, लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं करने को लेकर विरोध किया और नारेबाजी की।

इस तरह गंदा पानी पीने योग्य बनेगा
योजना में पानी का शोधन बायो फिल्टरेशन नैनो मैम्बरेन तकनीक से किया जाएगा। शोधन प्रक्रिया के दौरान कच्चे अवजल को स्क्रीनिंग के बाद बायो फिल्टर में पंप किया जाएगा, बायो फिल्टर में पांच स्तर के जैविक एवं अजैविक पदार्थ अर्थवर्मस, कॉटन एक्सट्रक्स, बैक्टीरिया ओरगैनिंग सेन्ड, पेबलस, स्टोन आदि होते हैं। उपचारित अवजल को फिर मैम्बरेन सिस्टम में पंप किया जाएगा, जहां उसमें क्लोरीन प्रवाहित की जाएगी और इसे पेयजल के लिए उपयोग में लाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
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