लोकसभा चुनाव के बाद से भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह आरोप लगाया जाता रहा कि उन्होंने देश की जनता से बड़े-बड़े वादे किए जिन्हें पूरा करना असंभव है।
इसी साल फरवरी में दिल्ली में हुए विधान सभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने भी बीजेपी पर जनता से लंबे-चौड़े वादे कर मुकर जाने का आरोप लगाया।
हालांकि विधान सभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली की जनता से वादे करने की होड़ में बाकी सभी दलों को पीछे छोड़ दिया। लेकिन तीन महीने के अंदर ही आप ने अपने वादों से पलटने की सार्वजनिक घोषण कर दी।
'आधे वादे भी पूरे हो जाएं तो बढ़ी बात'
बिजली, पानी से लेकर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा देने का वादा करने वाले केजरीवाल ने सत्ता में आने के तीन महीने बाद ही असलियत अपने मुंह से बयान कर दी।
केजरीवाल ने साफ कह दिया कि चुनाव में किए गए वादे पांच साल में भी पूरे नहीं किए जा सकते। उन्होंने साफ कहा कि हमने जो भी वादे किए हैं उनका 40 से 50% हिस्सा ही पूरा करे लें तो बड़ी बात है।
सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों के एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए केजरीवाल ने कहा कि जनता जितनी जल्दी पलकों पर बिठाती है उतनी ही तेजी से गिरा भी देती है।
केजरीवाल ने कहा कि शुरु में लग रहा था कि जनता के किए गए वादे पूर होंगे या नहीं। लेकिन अब लगता है चालीस-पचास फिसदी वादे तो जरूर पूरे होंगे। हालांकि केजरीवाल ने माना कि पांच साल में अगर चालीस-पचास फिसदी वादे भी पूरे होते हैं तो यह बड़ी बात होगी।
नौकरशाही में विकसित करना होगा कंप्टीशन सिस्टम
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि जनता ने जो भरोसा जताया है उसमें वादे पूरे करने होंगे। इसके लिए पूंजीवादी प्रतियोगिता की तर्ज पर नौकरशाही में भी कंप्टीशन सिस्टम विकसित करना होगा।
हमने वैट कमिश्नर और एक्साइज कमिश्नर के पद से इसकी शुरुआत की घोषणा की है। जो अच्छी डिलीवरी देंगे उन्हें पुरस्कार-तरक्की मिलेगी लेकिन बेईमानी से काम करने वालों को सजा भी देंगे।
आईएएस अफसर के पद हैं, लेकिन अगर योजना ठीक नहीं दी तो दानिक्स या उनमें भी नहीं मिले तो आम जनता से आवेदन मंगाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि 12 फीसदी ग्रोथ के साथ राजस्व दें लेकिन सिस्टम सुधारकर, न कि रेड करके।
जो ज्यादा देगा उसमें इनसेंटिव मिलेगा। वहीं बाजार एसोसिएशन को जोड़कर अगर पिछले साल के मुकाबले अधिक टैक्स देंगे तो उनकी मर्जी से अतिरिक्त राजस्व का 10 फीसदी बाजार विकास में सरकार खर्च करेगी।
केजरीवाल नहीं हैं ब्यूरोक्रेसी के हिमायती
इंडियन सिविल सर्विस डे में सिविल सर्विस के अवसर और चुनौतियों की परिचर्चा के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारी सरकार पब्लिक सर्वेंट से पार्टनरशिप चाहती है।
मैं ब्यूरोक्रेसी का हिमायती नहीं हूं, लेकिन मेरा मानना है कि जब तक राजनीति सड़ी गली रहेगी, नौकरशाही डिलीवरी नहीं दे सकती।
जो उम्मीदें जनता की हैं, अगर अब पूरी नहीं की तो राजनेताओं की तरह नौकरशाही से भी भरोसा उठ जाएगा। कुछ नहीं बचेगा। परिचर्चा पैनल में डॉ. राजीव धवन, राम जेठमलानी, टीएसआर सुब्रमणियन, एनके सिंह वक्ता थे।
सीएम ने भाषण में कहा दो महीने का अनुभव अच्छा है। पांच साल में 100 फीसदी नहीं तो 40-50 फीसदी तो वादा पूरे जरूर करेंगे।
डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को दिलाया भरोसा
वहीं, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि जनता के अवसर-चुनौती को समझे बिना सिविल सर्विसेंज के अवसर चुनौती को नहीं समझ सकते। अगर किसी अधिकारी के पास टैलेंट है।
सेवा जनता की जरूरतों के हिसाब से ठीक दे रहा है तो हम सेवा दो साल नहीं लगातार पांच साल भी लेंगे। काम जनता की दिक्कतों के कारण रुक रहा है तो हमें बताएं, अच्छा लगेगा।
अगर कानून के कारण रुक रहा है तो बताएं, उसमें बदलाव करेंगे। कानूनों की वजह से काम न रोकें। शिक्षण व्यवस्था पर भी कटाक्ष किए।