आम आदमी पार्टी (आप) को दिल्ली की जीत से बड़ी उम्मीदे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बेशक पांच साल दिल्ली को देने का दावा कर रहे हैं। लेकिन सरकार की जगह उनकी नजर संगठन पर है। मंत्रियों को विभागों का बंटवारा इसी तरफ इशारा करता है।
केजरीवाल ने अपना पूरा काम उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कैबिनेट पर डाल दिया है। इससे दिल्ली सरकार भी चलेगी और उन्हें पार्टी के विस्तार करने का मौका भी मिलेगा। साथ ही केजरीवाल विपक्षियों के निशाने पर भी नहीं आएंगे।
हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के बाद केजरीवाल ने दो टूक कहा कि पिछली जीत से उपजा अहंकार इस बार हमें नहीं करना है। वह पांच साल सिर्फ दिल्ली में काम करेंगे। फिर भी, विभाग न होने से उन्हें दिल्ली में रहकर संगठन मजबूत करने में अड़चन नहीं आएगी। वहीं, उन्हीं के चेहरे के सहारे पार्टी राष्ट्रीय फलक पर जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि कैबिनेट पर पार्टी रणनीतिकारों में गंभीर चर्चा हुई थी। बैठक में यह बात सामने आई कि पिछली बार अगर मुख्यमंत्री के अलावा केजरीवाल के पास कोई जिम्मेदारी न होती, तो बगैर इस्तीफा दिए लोकसभा चुनाव लड़ा जा सकता था।