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ये है वो शहर जहां विवादित फिल्मों पर भी नहीं होता हंगामा

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शरणार्थियों का शहर कहे जाने वाले फरीदाबाद में विवादित फिल्मों को भी दर्शकों ने पनाह दी है। विवादित मुद्दों पर बनाई गई फिल्मों का भले ही देशभर में विरोध हुआ हो, लेकिन यहां के दर्शकों ने बिना कोई गुरेज उनका स्वागत किया। पैंसठ साल पहले बसाए गए इस शहर के इतिहास में किसी भी सिनेमा घर में विवादित फिल्म को लेकर तोड़फोड़ या विरोध नहीं किया गया।
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विभिन्न संस्कृतियों वाले इस देश में संवेदनशील मुद्दों पर फिल्म बनाना हिम्मत का काम माना जाता है। आतंकवाद, धर्मांधता, लिव इन रिलेशन, यौन हिंसा, समलैंगिकता, जातिवाद, राजनैतिक भ्रष्टाचार, जातिवाद जैसे मुद्दों पर बनी फिल्मों को देश भर में विरोध झेलना पड़ा है। ऐसी फिल्में इस शहर में शांति पूर्वक रिलीज हुईं और दर्शकों ने उन्हें सराहा भी।

हाल ही में रिलीज हुई रमेश तौरानी की फिल्म पीके का देश भर में विभिन्न धार्मिक संगठनों ने विरोध किया। कई जिलों में पोस्टर जलाए गए, तोड़फोड़ भी की गई। शहर के दर्शकों ने इस फिल्म का स्वागत कई हाउसफुल शो के साथ किया।
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फायर और बैंडिट क्वीन रिलीज के साथ दो हफ्ते तक चली

1998 में रिलीज हुई दीपा मेहता की विवादित फिल्म ‘फायर’ का विरोध पूरे भारत में हुआ। इस वजह से देश के कई बड़े शहरों में इस फिल्म की स्क्रीनिंग रोकनी पड़ी थी, लेकिन शहर में यह फिल्म न सिर्फ रिलीज हुई, बिना किसी विवाद के दो सप्ताह तक सिनेमाघरों में चली भी।

किशोर के प्रेम फंतासी में डूबे रहने पर आधारित शशिलाल नायर की फिल्म ‘एक छोटी सी लव स्टोरी’ का भी शहर में विरोध नहीं हुआ। यह फिल्म अपने उत्तेजक दृश्यों के चलते रिलीज होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ चुकी थी।

डाकू फूलन देवी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ विवाद के चलते अन्य जिलों में कड़ी सुरक्षा के बीच रिलीज की गई थी। शहर में यह फिल्म शांतिपूर्वक चलाई गई।

जो बोले सो निहाल का दिल्ली-एनसीआर में जमकर विरोध हुआ था, पर इस शहर में विरोध तो दूर इस फिल्म के कई शो हाउस फुल गए थे। युवती के प्रेम में पड़े पादरी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सिन्स’ का विरोध पूरे देश में किया गया था।

इस फिल्म की रिलीज रुकवाने के प्रयास भी किए गए थे। हालांकि कमजोर कथा पटकथा और सिनेमैटोग्राफी की वजह से यह फिल्म दर्शकों को नहीं बटोर सकी थी फिर भी शहर में यह शांतिपूर्वक रिलीज होने के बाद उतर भी गई थी।
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किसी फिल्म का विरोध नहीं किया

सिनेमा संचालक अश्विनी सिंह कहते हैं कि शहर के दर्शक काफी समझदार हैं। यहां के दर्शक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की इज्जत करना जानते हैं, यही कारण है कि कभी किसी फिल्म का विरोध नहीं किया गया।

सामाजिक मामलों के जानकार ब्रह्मदत्त बताते हैं कि फरीदाबाद शहर में पूरे देश से आकर लोग बसे हैं। इसीलिए इसको मिनी इंडिया भी कहा जाता है।

विभिन्न संस्कृतियों का संगम होने की वजह से यहां के लोगों में एक-दूसरे के प्रति आदरभाव है। आपसी समझदारी ही यहां के लोगों को न सिर्फ फिल्म बल्कि अन्य कार्यक्रमों का विरोध नहीं करने देती।
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