आम आदमी पार्टी (आप) ने बेशक पंजाब चुनाव के लिए कमर कस ली है लेकिन पार्टी की फंडिंग लाइन सुस्त पड़ गई है। दिल्ली चुनाव के बाद से अब तक आप के चंदे में ज्यादा उछाल नहीं आया है।
खास बात यह कि चंदा देने वाले टॉप फाइव राज्यों में पंजाब का नाम भी शामिल नहीं है। इस संबंध में पार्टी का कहना है कि पंजाब चुनाव के चंदे को लेकर अभी कोई अभियान नहीं चलाया गया है। पार्टी को उम्मीद है कि दिल्ली की तरह चुनाव नजदीक आने के बाद पंजाब के लोग भी चंदा देने में आगे आएंगे।
दरअसल, चंदा लेने में पारदर्शिता बरतने के मकसद से आप रोजाना मिलने वाली नगदी को ऑनलाइन अपडेट करती है। इसमें चंदा देने वालों का नाम, उनके द्वारा दी गई धनराशि समेत दूसरे ब्योरे भी डाले जाते हैं।
सरकार बनने के बाद से चंदे की रफ्तार सुस्त
नवंबर 2014 से पार्टी इसी प्रक्रिया के तहत चंदा ले रही है। दिल्ली चुनाव के वक्त तक पार्टी का बड़े पैमाने पर चंदा मिला था लेकिन सरकार बनने के बाद से इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई।
यहां तक कि पंजाब के मुक्तसर में बड़ी रैली करने के बावजूद 14 जनवरी को पार्टी को 29 हजार रुपये से भी कम चंदा मिला। हालांकि, 13 जनवरी को पार्टी की झोली में 13 लाख रुपये से ज्यादा की रकम आई थी।
वहीं, 15 जनवरी को भी 1.15 लाख रुपये का चंदा मिला था। मालूम हो कि मुक्तसर रैली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता से चुनाव में आर्थिक सहयोग की अपील की थी।
जनता ने सिर्फ 2.6 प्रतिशत का अंशदान किया
केजरीवाल ने कहा था कि उनके पास चुनाव लड़ने के पैसे नहीं हैं। बावजूद इस अपील के अभी तक पंजाब के लोग फंडिंग के लिए आगे नहीं आए हैं।
कुल चंदे में पंजाब की जनता ने सिर्फ 2.6 प्रतिशत का अंशदान किया है। इस बारे में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अभी फंडिंग को लेकर बड़े स्तर पर अभियान नहीं चलाया गया है।
आने वाले वक्त में दिल्ली की तरह नए-नए तरीकों से चंदा देने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।