आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में न्यायमूर्ति से सुनवाई से अलग होने की मांग वाली अपनी रिक्यूजल अर्जी पर नया अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल किया
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अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से सुनवाई से अलग होने की मांग वाली अपनी रिक्यूजल अर्जी पर नया अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल किया है। शपथपत्र में केजरीवाल ने दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बेटा और बेटी केंद्रीय सरकारी वकीलों के पैनल में शामिल हैं और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं।
केजरीवाल ने कहा कि तुषार मेहता ही सीबीआई की ओर से इस मामले में पेश हो रहे हैं और वे न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों को भी केस सौंपते हैं। ऐसे में हितों का सीधा टकराव है और न्यायमूर्ति शर्मा इस मामले में निष्पक्ष आदेश कैसे दे सकती हैं। केजरीवाल ने तर्क दिया कि सॉलिसिटर जनरल को सुनवाई की पहली तारीख पर ही इस तथ्य की जानकारी अदालत को दे देनी चाहिए थी। शपथपत्र में केजरीवाल ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के हवाले से आंकड़े भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में न्यायमूर्ति शर्मा के बेटे को 2,487 केस, वर्ष 2024 में 1,784 केस और वर्ष 2025 में 1,633 केस सौंपे गए। केजरीवाल ने दावा किया कि ये तथ्य रिक्यूजल अर्जी दाखिल करने के बाद उनके संज्ञान में आए हैं।
केजरीवाल ने अदालत से आगे मौखिक और जवाबी दलीलें पेश करने के लिए पर्याप्त समय देने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष सुनवाई जारी रखने से पूर्ण न्यायिक निष्पक्षता, स्वतंत्रता और तटस्थता का आभास नहीं होता, जैसा कि कानून अपेक्षा करता है। 13 अप्रैल को हुई सुनवाई का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अदालत ने उनके शपथपत्र पर फैसला सुरक्षित रखने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का उचित और निष्पक्ष मौका नहीं दिया।