नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई पहचान ही नहीं बल्कि नई ऊंचाई भी दी। साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त नामवर का जन्म चंदौली जिले के जीयनपुर में हुआ था। काशी विश्वविद्यालय से साहित्य में एमए और पीएचडी करने के बाद वहीं कई साल तक प्रोफेसर रहे। आलोचना में उनकी किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद आदि मशहूर हैं।
उनका साक्षात्कार ‘कहना न होगा’ भी साहित्य जगत में लोकप्रिय है। इसके अलावा उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें भी चर्चित हैं। नामवर सिंह ने सागर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन कार्य किया, लेकिन सबसे लंबे समय तक वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहे। यहां से रिटायर होने के बाद वह एमिरिटेस प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाते रहे।