दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री व सोशल मीडिया की गहरी समझ रखने वाले भाजपा नेता कपिल मिश्रा चुनावी मैदान में हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी (आप) नेतृत्व पर पार्टी छोड़ने वाले कपिल मिश्रा को भाजपा ने मॉडल टाउन से उम्मीदवार बनाया है। अमर उजाला ने दिल्ली चुनाव से जुड़ी रणनीति पर उनसे चर्चा की।
आप आम आदमी पार्टी में भी रहे और अब भाजपा से उम्मीदवार हैं। दोनों दलों में क्या फर्क है?
भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि अरविंद केजरीवाल ने आप को सिंगल सीटर मोपेड बना दिया है। दोनों में कोई तुलना ही नहीं है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज पूरी तरह से आत्म मुग्ध हैं। उनके अलावा आप के किसी दूसरे नेता की स्वतंत्र आवाज नहीं बची है। यहां तक कि कार्यकर्ता तक जमीन पर नहीं बचे हैं, जबकि भाजपा में हर स्तर पर न सिर्फ संगठन मजबूत है, बल्कि भाजपा के नेतृत्व का भी कोई सानी नहीं है।
लेकिन भाजपा को दिल्ली में चुनौती तो आप से ही है?
खुशफहमी के लिए आप के लोग सोच सकते हैं। आज भाजपा को दिल्ली में टक्कर देने वाला कोई नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भाजपा सत्ता हासिल करने जा रही है।
इतना यकीन तो शायद भाजपा नेताओं को भी नहीं होगा?
नहीं, ऐसा नहीं है। भाजपा के प्रचार अभियान को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने वाले आम कार्यकर्ताओं तक को पता है कि भाजपा जीत की तरफ बढ़ रही है।
दिल्ली चुनाव के अहम मसले क्या हैं?
दिल्ली सरकार की पांच साल की नाकामी और राष्ट्र को जोड़ने वाले मसले पर कांग्रेस व आप के देश विरोधी रुख दिल्ली चुनाव की दिशा तय करने जा रहे हैं। दिल्ली के लोग जानते हैं कि किस तरह आप ने मौकापरस्ती दिखाई है। यहां तक कि अपने 15 विधायकों का टिकट काट लिया। इसकी जगह उसे धन्नासेठों को बेच दी।
लेकिन अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है।
अगर अच्छा काम किया है तो उन्होंने टिकट क्यों बदल दिया। टिकट बदलने का मतलब ही है कि उनको अपने और अपनों पर भरोसा नहीं है। दो सिख विधायकों का टिकट कटने से आज दिल्ली का पूरा सिख समुदाय आप से नाराज चल रहा है।