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Kanjhawala Case: पुलिस रोज बदल रही कहानी, पढ़ें पहले दिन से लेकर अब तक कितनी बार बदले बयान

Fri, 06 Jan 2023 10:05 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जानकारों का कहना है कि गैर पेशेवर तरीके से की गई जांच इसकी बड़ी वजह है। हादसे के छह दिन बाद शुक्रवार को पुलिस ने दावा किया है कि अंजलि को जिस कार से घसीटा गया था उसमें पांच नहीं, चार आरोपी मौजूद थे। 
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स्पेशल सीपी सागर प्रीत हुड्डा - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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देश की सबसे स्मार्ट पुलिस का दंभ भरने वाली दिल्ली पुलिस कंझावला मामले में बिल्कुल नौसिखिए की तरह जांच कर रही है। यही वजह है कि पुलिस रोज एक नई कहानी मीडिया के सामने लेकर आ रही है। वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने आनन-फानन में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर केस सुलझाने का दावा किया। समय बीतने के साथ हर दिन पुलिस नई थ्योरी और कहानी के साथ सामने आई। 

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जानकारों का कहना है कि गैर पेशेवर तरीके से की गई जांच इसकी बड़ी वजह है। हादसे के छह दिन बाद शुक्रवार को पुलिस ने दावा किया है कि अंजलि को जिस कार से घसीटा गया था उसमें पांच नहीं, चार आरोपी मौजूद थे। अगर जांच में सतर्कता बरती गई होती तो इस तथ्य का पता सीडीआर की मदद से पहले ही दिन लग सकता था। उधर, पुलिस ने इस मामले में अंजलि की सहेली निधि को थाने बुलाकर पूछताछ की।

अब तक स्पष्ट नहीं किस आरोपी की हादसे में भूमिका
दिल्ली पुलिस अभी भी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि किस आरोपी की हादसे में क्या भूमिका थी। ऐसा लग रहा है कि आरोपी जो कहानी पुलिस को सुनाते हैं, पुलिस उसे हकीकत समझकर मीडिया को बयां कर देती है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि इस मामले की गंभीरता को समझा जाता तो कम से कम वारदात की बेसिक जानकारी स्पष्ट होती, लेकिन हर दिन नई कहानी सामने आई। पहले दिन यह कहा गया कि अंजलि हादसे के समय अकेली थी। लेकिन दो दिन बाद अचानक कहानी में अंजलि की दोस्त निधि आ जाती है और पुलिस उसे थाने लाकर उससे पूछताछ की जाती है। संदिग्ध भूमिका वाली निधि भी पुलिस को रोजाना अलग-अलग कहानी सुनाती है। छह दिन बाद पुलिस बताती है कि हादसे वाली कार दीपक नहीं बल्कि उसका चचेरा भाई अमित खन्ना चला रहा था। वारदात के समय दीपक तो अपने घर पर मौजूद था।

कोई दिन ऐसा नहीं जा रहा जिस दिन दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त सागरप्रीत हुड्डा मीडिया से जानकारी साझा न करते हो। गुरुवार को पुलिस ने मामले में अचानक दो और आरोपी आशुतोष और अंकुश को भी शामिल कर लिया। पुलिस का कहना था कि इन लोगों ने आरोपियों की मदद की। घटना की जानकारी होने के बाद भी तथ्यों को छिपाया। इसलिए इनको भी इस पूरे कांड में शामिल किया गया है, जबकि कार का मालिक आशुतोष था। पुलिस उसे बुलाकर हकीकत का पता कर सकती थी। 

सूत्रों का कहना है कि घटना के समय हुई पीसीआर कॉल और पुलिस की सक्रियता से लेकर उसकी जांच हर मामले में घोर लापरवाही बरती गई। यही वजह है कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि यदि मामला मीडिया की सुर्खियों में न आया होता तो शायद इसे सामान्य सड़क हादसे का केस बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता।
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पुलिस कब-कब बदले बयान
  • एक जनवरी को पुलिस ने बताया कि एक कार हादसा से हुआ है, जिसमें पांच लोग सवार थे। मामला दर्ज कर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। धाराएं सड़क दुर्घटना की लगाई गईं।
  • दूसरे दिन पुलिस ने 13 किमी तक घसीटने की बात कही और धाराएं सख्त कीं। इसमें गैर-इरादतन हत्या की धारा जोड़ी गई थी।
  • तीसरे दिन पुलिस ने खुलासा किया कि हादसे के वक्त अंजलि की दोस्त भी निधि स्कूटी पर सवार थी। पूरे मामले की जांच के लिए विशेष पुलिस आयुक्त के निगरानी में कमेटी गठित की गई।
  • चौथे दिन हादसे के दौरान पुलिसकर्मियों की लापरवाही की बात सामने आई।
  • पांचवें दिन पलिस ने खुलासा किया कि मामले में दो अन्य आरोपी भी शामिल हैं। यही नहीं, कार चालक आरोपी दीपक नहीं, अमित है।
  • छठवें दिन पुलिस ने फिर अपनी थ्योरी बदली और बताया कि कार में सिर्फ चार लोग सवार थे। कार चलाने वाले जिस पांचवें आरोपी की बात कही जा रही थी, वह उस वक्त अपने घर पर मौजूद था।
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