हालांकि, बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि अंजलि मामले में शामिल दीपक वह दीपक नहीं है, जिसके लिए निधि काम करती थी। छह दिसंबर 2020 को निधि के खिलाफ यूपी जीआरपी आगरा कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें यूपी पुलिस ने निधि समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी दिखाई थी। इनके पास से काले रंग की पॉलीथिन में गांजा बरामद किया गया था। इसका वजन 10 किलो था।
पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें दो युवकों ने बताया कि वह खुद के इस्तेमाल के लिए गांजा लेकर जा रहे थे जबकि निधि ने बताया कि वह दिल्ली के रहने वाले दीपक के लिए गांजा लेकर आ रही थी। तीनों ने यह भी बताया कि गांजे की खेप सिकंदराबाद (तेलंगाना) से ट्रेन से लेकर आए थे। यहां से वह सड़क के रास्ते खेप को दिल्ली ले जा रहे थे।
अंजलि मामले में भी एक आरोपी का नाम दीपक है जिसको लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि यह वही दीपक है, जिसके लिए निधि गांजे की तस्करी कर रही थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दीपक ग्रामीण सेवा का चालक है और जांच के दौरान उसके नशीले पदार्थ की तस्करी में संलिप्तता की बात सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि अंजलि के मामले में यह बात सामने आई है कि निधि पर आगरा में दो साल पहले एक प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसमें वह ड्रग्स तस्करी में पकड़ी गई थी। प्राथमिकी में लिखा गया है कि निधि जिसके लिए तस्करी कर रही थी उसका नाम दीपक है।
मालीवाल ने कहा कि एक दीपक अंजलि मामले में भी आरोपी है। अब यह जानने की बहुत जरूरत है कहीं यह दो दीपक एक ही तो नहीं हैं। क्या निधि और जो अंजलि के मामले में आरोपी शामिल हैं उनके बीच कोई संबंध तो नहीं है। इनकी कोई जान पहचान तो नहीं थी, इसकी जांच होनी बहुत जरूरी है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच काफी खराब रही है। दिल्ली महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही दिल्ली पुलिस ने निधि के फोन को अपने कब्जे में लिया और उससे पूछताछ भी इसके बाद ही की गई है।