जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का कहना है कि विश्वविद्यालय पढ़ाई-लिखाई की जगह होता है। कैंपस में हिंसा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। हिंसा लेफ्ट के छात्रों ने की हो या राइट के, लेकिन लेफ्ट और राइट के नाम पर असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
कन्हैया ने दिल्ली पुलिस और कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार पर आरोप लगाया कि दोनों ने ही अपना काम ठीक से नहीं किया। उन्होंने दोनों से अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाने और हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। दिल्ली पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कन्हैया ने कहा कि जिस तरीके से शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस की, उससे लगा मानो एबीवीपी की प्रेस कांफ्रेंस चल रही है। कन्हैया का आरोप है कि सरकार छात्रों के सवाल सुनने को तैयार नहीं है।
विश्वविद्यालय को संभालने की जिम्मेदारी प्रो. एम. जगदीश कुमार पर है, लेकिन जब से उन्होंने कुलपति पद संभाला है, लगातार विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। छात्र फीस वृद्धि को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन वीसी ने कभी भी उनसे संवाद ही नहीं किया। सभी कमेटियों को नजरअंदाज करते हुए फीस वृद्धि कर दी। छात्रों ने आवाज उठाई तो नामांकन रद्द करने की धमकी दे डाली।
‘जेएनयू को व्हाट्स ऐप यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी’
कन्हैया ने आरोप लगाया कि कुलपति जेएनयू को व्हाट्स ऐप यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। छात्रों ने फीस वृद्धि मुद्दे पर दिसंबर सेमेस्टर की परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। कुलपति ने अपना एकेडमिक कलेंडर पूरा करने के लिए घर बैठे व्हाट्स ऐप व ईमेल पर परीक्षाएं लीं। अब तक हम जिस व्हाट्स ऐप यूनिवर्सिटी की बात करते थे, वीसी साहब जेएनयू को वही बनाना चाहते हैं।