जेएनयू हिंसा मामले में बाहरी हमलावरों को पकडने के लिए एसआईटी ने बस की डिटेल खंगालना शुरू कर दिया है। एसआईटी के पुलिस अधिकारी मान रहे हैं कि हो सकता है हमलावर बस में बैठकर जेएनयू कैंपस में आए हो।पुलिस ने हिंसा वाले दिन यानि पांच जनवरी को जेएनयू के गेटों पर मौजूद गार्डों से पूछताछ करना शुरू कर दिया है। पुलिस को जेएनयू कैंपस के गेटों के इंट्री रजिस्टरों से कुछ नहीं मिला है। पुलिस ने सभी इंट्री रजिस्टरों को अपने कब्जे में ले लिया है।
जेएनयू हिंसा मामले की जांच कर रही अपराध शाखा की एसआईटी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि शुरूआती जांच में ये बात सामने आई है कि हो सकता है बाहरी युवक बस में बैठकर जेएनयू कैंपस में आए हों। दरअसल जेएनयू कैंपस के अंदर 615 रूट की बस जाती है। ये पूर्वांचल हॉस्टल तक जाती है।
कुछ महीने पहले जब दूसरी सिक्यूरिटी थी तो बस की गेट पर चेकिंग की जाती थी। अब जेएनयू के गेटों पर सिक्यूरिटी बदल गई है। हिंसा वाले दिन तक जब बस कैंपस के अंदर जाती थी तो बस की चेकिंग नहीं होती थी। बिना चेकिंग के ही बस कैंपस के अंदर चली जाती है। ऐसे में पुलिस अधिकारी मान रहे है कि बाहरी युवक बस के अंदर बैठकर गए हो।
पुलिस इन गार्डों से पूछताछ कर रही है जो हिंसा वाले दिन जेएनयू कैंपस के मेन गेट पर तैनात थे। पुलिस गार्डों से ये पूछ रही है कि क्या बस को चेक किया गया था या नहीं। बस में कितने और किस तरह के लोग बैठे हुए थे। सवाल ये होता है कि सिक्यूरिटी बदलने के बाद बस की चेकिंग बंद क्यों कर दी गई थी।
एसआईटी के पुलिस अधिकारियों के अनुसार जेएनयू में हिंसा के समय दो व्हाट्सऐप ग्रुप बने थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार हिंसा के तुरंत बाद इन व्हाट्सएप ग्रुप को डिलीट कर दिया गया था। पुलिस जांच के हिसाब से इन व्हाट्सएप ग्रुप को बहुत की उपयोगी मान रही है। पुलिस ने इन व्हाट्सएप ग्रुप की डिटेल लेने के लिए व्हाट्सएप को पत्र लिखने जा रही है।