जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम जमानत के बाद रिहा कर दिया गया। कन्हैया कुमार को रिहाई के बाद जेएनयू ले जाया गया।
तिहाड़ से कन्हैया को गुपचुप तरीके से बाहर निकाला गया क्योंकि पटियाला हाउसकोर्ट में कन्हैया कुमार पर हुए हमले के बाद पुलिस उसकी सुरक्षा को लेकर काफी सजग नजर आ रही थी।
बुधवार को हाईकोर्ट ने कन्हैया को 6 महीने की अंतरिम जमानत दी। भले ही कन्हैया को हाईकोर्ट से कल शाम 7 बजे जमानत मिल गई थी, लेकिन देर होने के चलते उसे जेल से छुट्टी नहीं मिल सकी थी।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कन्हैया कुमार की जमानत का विरोध किया था, लेकिन पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। इससे पहले 29 फरवरी को जमानत पर हुई बहस के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जांच रिपोर्ट में मिली क्लीनचिट
इतना ही नहीं दिल्ली सरकार की जांच रिपोर्ट में भी कन्हैया को क्लीन चिट दी गई
है। रिपोर्ट के अनुसार कन्हैया कुमार के खिलाफ सबूत नहीं मिले।
यह भी साबित न हो सका कि कन्हैया ने देशद्रोह के नारे लगाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक उमर खालिद ने ही कार्यक्रम में कश्मीर की आजादी के नारे लगाए थे।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि विवादित कार्यक्रम का आयोजक उमर खालिद ही था। कन्हैया कुमार पर दिल्ली सरकार की जांच रिपोर्ट में देशद्रोह के आरोप साबित नही हुए।
जेएनयू में हो रही जश्न की तैयारी
कन्हैया को 12 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कोर्ट के फैसले के बाद कन्हैया के समर्थन में जेएनयू छात्रों ने जमकर जश्न मनाया।
फैसले से कन्हैया के परिजन भी खुश नजर आए। एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कन्हैया की मां ने इसे राहत भरा फैसला बताया है।
वहीं कन्हैया के पिता जयशंकर सिंह ने कहा कि उन्हें संविधान और न्यायालय पर पूरा भरोसा है और जो भी होगा अच्छा ही होगा। यह लड़का कहीं से भी गलत नहीं है। यह संघ और बीजेपी वालों ने साजिश रच इसके भविष्य को खराब करने की कोशिश की है।
जेएनयू छात्रसंघ उपाध्यक्ष ने कहा है कि कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं, कन्हैया की रिहाई के लिए उन्होंने विजय मार्च निकालने की योजना बनाई है।