जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी मामले में आरोपी छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया को मिली अंतरिम जमानत रद्द करने के मुद्दे पर पहली बार उपराज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष वकील व दिल्ली सरकार के स्थाई अधिवक्ता एक मत हुए।
दोनों ने कन्हैया की जमानत रद्द करने के लिए दायर याचिका पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि कन्हैया ने जमानत की शर्तो का उल्लंघन किया है या नहीं, लेकिन उनकी नजर में अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया।
अदालत ने याचिका पर सवाल उठाते हुए सुनवाई 28 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने सुनवाई शुरू होते ही याची विनीत जिंदल के अधिवक्ता आरपी लूथरा से पूछा कि आखिर इस प्रकार की याचिका दायर करने में आपका लोकस क्या है। इस मामले में आप पक्ष नहीं है।
याची ने कहा कि अगर कोई समाज को बांटने और प्रभावित करने की कोशिश करता है तो कोई भी उसके खिलाफ याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार पहल नहीं करती तो देश का कोई भी नागरिक याचिका दाखिल कर सकता है।
याचिकाकर्ता ने कहा की कन्हैया ने जमानत की शर्तों का उलंघन किया है। कन्हैया जमानत पर छूटने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। कन्हैया ने कहा की कश्मीर में सैनिक महिलाओं के साथ बलात्कार करते है।