अप्रैल में गुड़गांव में हुए एक रोड एक्सिडेंट में मेंदांता अस्पताल के डॉक्टर पंकज गुप्ता और उनकी तीन वर्षीय बेटी लिनेश्या की मौत का जख्म एक बार फिर किसी के दिल में ताजा हो गया।
ये कोई और नहीं डॉक्टर पंकज की पत्नी ज्योति गुप्ता हैं जिन्हें कैबिनेट मंत्री की मृत्यु ने अपना दर्द याद दिला दिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये दोनों ही हादसे रोड सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन न करने की वजह से हुई हैं।
यही कारण है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऑनलाइन याचिका दी है जिसमें उन्होंने रोड सेफ्टी कानून में सुधार और कड़ा बनाने की मांग की है। उन्होंने अपने भावनात्मक पत्र में लिखा है कि किस तरह उन्होंने अपने पति और बेटी की मौत को देखा है ये उनके लिए शब्दों में बता पाना आसान नहीं है।
उन्होंने ये भी लिखा है कि रोड सेफ्टी को लेकर देश में सिर्फ एक कानून है मोटर वाहन एक्ट 1988 जो बिल्कुल भी प्रभावी नहीं है। ज्योति ने चिट्ठी में लिखा है कि 'हमें एक ऐसा कानून चाहिए जिसमें: (1) बच्चों, पैदलयात्रियों और साइकिल चलाने वालों की सेफ्टी की सुरक्षा हो, (2) जिसे सख्ती से लागू करवाया जाए (3) अनिवार्य रोड सुरक्षा की शिक्षा दी जाए और (4) लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पारदर्शी और पर्याप्त प्रक्रिया हो।'
ज्योति की याचिका गुरूवार को सुबह करीब 8 बजे एक वेबसाइट चेंज डॉट ऑर्ग पर भी लाइव हुई जो खुले तौर पर जनता से ऐसी याचिकाओं के लिए उनके हस्ताक्षर के जरिए सपोर्ट मांगता है। इस याचिका के लाइव होने के बारह घंटों के अंदर ही एक हजार से ज्यादा लोग इस याचिका के लिए अपने ऑनलाइन हस्ताक्षर कर चुके थे।
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ज्योति अपने पत्र में लिखती हैं कि कैसे उनकी पूरी दुनिया ही अचानक से उलट-पुलट हो गई। 'मैंने एक मिनट में ही अपना सब कुछ गंवा दिया और वो ड्राइवर जिसने मेरे परिवार को कुचल दिया दिया कुछ ही घंटों बाद जेल के बाहर था। मैं तो अब भी इस सदमे से उबर नहीं पाई हूं।'
ज्योति ने बताया कि ऐसे हादसे का शिकार होने वाली मैं अकेली नहीं हूं। यहां तक कि कैबिनेट मंत्री गोपीनाथ मुंडे ने भी रोड एक्सीडेंट में ही अपनी जान गंवा दी। यही नहीं भारत में पिछले 10 सालों में 10 लाख से भी ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं।
इस स्थिति में बदलाव की जरूरत है इसलिए मैंने सेव लाइफ फाउंडेशन के साथ मिलकर ये याचिका दी है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कड़े रोड सेफ्टी कानून को सदन में पेश किए जाने के लिए आश्वासन चाहती हूं।
सेव लाइफ फाउंडेशन को चलाने वाले पीयूष तिवारी जिनकी भतीजी कुछ साल पहल सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी कहते हैं कि भारत में सड़क हादसों की संख्या इतनी ज्यादा होने का कारण सड़क पर ठीक से न चलना, सड़कों की अजीब डिजाइन, नियमों को लागू न करा पाना और उपचार सुविधाओं की कमी है। हमारे कानून को ज्यादा से ज्यादा जवाबदेह और दोषियों को कड़ी सजा देने वाला होने की जरूरत है।