हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने खुद को जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल की याचिका पर सुनवाई से अलग कर लिया। गोयल ने याचिका दायर कर उनके खिलाफ खोले गए लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) और इससे संबंधित सरकारी आदेशों को रद्द करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू के समक्ष यह याचिका शुक्रवार को सुनवाई के लिए आई तो उन्होंने खुद को इसकी सुनवाई से अलग करते हुए किसी अन्य जज के समक्ष सूचीबद्घ करने के लिए कहा है। उन्होंने इसका कोई कारण नहीं बताया। याचिका पर अब 9 जुलाई को अन्य पीठ के समक्ष सुनवाई होगी।
गोयल ने कहा कि उनके खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने एलओसी जारी कराया था और यह कार्यालय कंपनी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आता है। एलओसी का पता उन्हें तब चला जब उन्हें और उनकी पत्नी को 25 मई को दुबई जाने वाले विमान से उतार दिया गया। उनके खिलाफ ऐसी कोई एफआईआर या ईसीआईआर नहीं है और ना उन्हें नामजद किया गया है, जिमसें एलओसी खुलवाने की जरूरत हो।
कंपनी कार्यालय मंत्रालय के मुताबिक, जेट एयरवेज में व्यापक स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर नरेश गोयल के खिलाफ एलओसी जारी किया गया था। जेट एयरवेज ने धन की कमी के कारण अप्रैल में काम करना बंद कर दिया था। इससे पहले मार्च में नरेश व अनीता गोयल ने कंपनी के निदेशक मंडल से इस्तीफा दे दिया था।
इस कंपनी का गठन 26 साल पहले किया गया था। नरेश गोयल कंपनी के चेयरमैन पद से भी इस्तीफा दे चुके हैं। मंत्रालय ने जेट एयरवेज में कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच करने का आदेश भी एसएफआईओ को दिया है।