अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री को तेरहवां शैलीकार प्रभाकर सम्मान प्रदान किया गया है। उपराष्ट्रपति निवास पर एक समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने उन्हें यह सम्मान दिया।
लगभग तीन दशकों की प्रतिबद्ध पत्रकारिता के लिए विनोद अग्निहोत्री को यह सम्मान दिया गया है। पत्रकार, लेखक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' की स्मृति में यह सम्मान स्थापित किया गया है।
यह सम्मान देते हुए हामिद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता के लिए यह एक बड़ी शर्त है कि जो लिखा जा रहा है वह विश्वसनीय और सच हो। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारत ने संविधान बनाया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अहम स्थान दिया लेकिन इस पर ध्यान देना आवश्यक है कि क्या हमारे देश में पत्रकारिता की दिशा और दशा ठीक है?
उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर नाम की संस्था ने निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता का जो सूचकांक तैयार किया है उसके अनुसार 180 देशों में भारत की पत्रकारिता 136 वें स्थान पर है। और यह आंकड़ा बताता है कि हमें अभी काफ़ी दूर जाना है।"
साथ ही उन्होंने पत्रकारिता के खतरों का भी जिक्र किया और कहा कि सूचकांक में यहां भी भारत का आंकड़ा ठीक नहीं है। सम्मानित किए जाने के लिए आभार प्रकट करते हुए विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि उनकी कोई विचारधारा नहीं है।
पत्रकारिता में आने के लिए उनका चयन राजेंद्र माथुर ने किया था और उनके साथ काम करने का मौका भी उन्हें मिला। इसके बाद वे आलोक मेहता तक कई संपादकों के साथ काम कर चुके हैं और मानते हैं कि पत्रकारिता को निष्पक्ष होना चाहिए।
उनका कहना था कि ऐसा नहीं है कि उनकी कोई विचारधारा नहीं है। उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता संग्राम से जो विचारधारा निकली है और जिसकी पुष्टि भारत के संविधान ने किया है, मैं उसका पालन करता हूं। यह विचारधारा धर्मनिरपेक्षता और समरसता की पक्षधर है। लेकिन जब मैं पत्रकारिता करता हूं तो कोशिश करता हूं यह विचारधारा मेरे लेखन में हावी न होने पाए और मैं तटस्थ रहूं।"
उन्होंने कहा कि इस सम्मान से उन पर निष्पक्ष और तटस्थ रहने की जिम्मेदारी बढ़ी है।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता और वनस्थली विद्यापीठ के कुलपति आदित्य शास्त्री भी मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत अखिलेश प्रभाकर के स्वागत भाषण से हुई।