सरकार, विशेषज्ञ और नागरिक संगठनों की सहमति से तय होगी यमुना बाढ़ क्षेत्र के विकास की दिशा
तीन दौर की बैठकों के बाद डीडीए तैयार करेगा जीरो ड्राफ्ट, सभी हितधारकों से फिर मांगे जाएंगे सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना के पुनर्जीवन और बाढ़ क्षेत्र के विकास के लिए अब दिल्ली में सभी संबंधित पक्षों की सहमति से एक साझा एक्शन प्लान तैयार होगा और उसी के अनुरूप काम आगे बढ़ेगा। इसके लिए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की निगरानी में अब तक तीन दौर की परामर्श बैठकें की गई हैं। इनके सुझावों पर डीडीए जल्द ही दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट का जीरो ड्राफ्ट तैयार करेगा। इस मसौदे पर 11 सितंबर को यमुना डायलॉग्स में चर्चा होनी है। इसके बाद इसे भविष्य की नीति और कामकाज का आधार बनेगा।
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के निर्देश पर डीडीए को इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। यमुना बाढ़ क्षेत्र के दौरे और समीक्षा बैठकों के दौरान एलजी ने कहा था कि नदी को प्रदूषण से मुक्त करने और बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर योजना तैयार की जाए। इसके बाद तीन चरण में हितधारक परामर्श कार्यशालाएं हुईं। इन बैठकों में नीति निर्माता, सरकारी विभाग, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शहरी योजनाकार, वित्तीय संस्थान और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। बाढ़ क्षेत्र की योजना, घाटों का विकास, प्रकृति आधारित समाधान, जल गुणवत्ता, ड्रेनेज, वित्तीय व्यवस्था और बेहतर प्रशासन जैसे छह प्रमुख विषयों पर सुझाव लिए गए। अब इन सुझावों से ऐसी योजना तैयार करना है, जिसे जमीन पर आसानी से लागू किया जा सके।
सितंबर में आएगा साझा विजन
सभी सुझावों को मिलाकर दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट का जीरो ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इसे हितधारकों के साथ साझा करने के बाद 11 सितंबर को बांसेरा में होने वाले यमुना डायलॉग्स में योजना को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी। इसके आधार पर यमुना बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण, विकास और प्रबंधन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।