केजरीवाल से मिली जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की मां
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जेएनयू कैंपस से 15 अक्तूबर से लापता छात्र नजीब अहमद की सुरक्षित वापसी और न्याय दिलाने की मांग को लेकर मां फातिमा व छात्रों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने पूरा घटनाक्रम बताते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। वहीं, मुख्यमंत्री ने परिजनों समेत छात्रों की हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया।
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित के मुताबिक, नजीब के परिजनों के साथ छात्रों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार शाम को मुख्यमंत्री से मिला और नजीब की सुरक्षित वापसी व न्याय दिलाने की मांग रखी।
प्रतिनिधिमंडल ने केजरीवाल को एक मांग पत्र भी सौंपा, जिसमें 14 से 31 अक्तूबर तक के घटनाक्रम का जिक्र है। उन्हें बताया गया कि पुलिस मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। जब भी पुलिस के आलाधिकारियों से नजीब लापता मामले की जांच कहां तक पहुंची, पूछते हैं तो वे एक ही जवाब देते हैं कि जांच जारी है।
पुलिस मस्जिदों व दरगाहों में नजीब की तलाश कर रही है
नजीब अहमद की मां
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पुलिस मस्जिदों व दरगाहों में नजीब की तलाश कर रही है। हम जेएनयू कैंपस स्थित जंगल में जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक नहीं हुई। वहीं, नजीब से मारपीट करने वाले तीन एबीवीपी के छात्रों से पुलिस ने अभी तक पूछताछ नहीं की है।
जबकि लापता का मामला दर्ज होने के बाद मारपीट व जान से मारने की धमकी देने वाले तीनों छात्रों को भी नामजद किया जाना चाहिए। वहीं, विश्वविद्यालय प्रबंधन का नजीब के परिवार के साथ रवैया भेदभावपूर्ण है। क्योंकि कुलपति ने नजीब के लापता होने के बाद परिवार के साथ कोई बैठक तक नहीं की।
छात्रों और नजीब के परिवार की मांग के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ हैं। नजीब की तलाश समेत परिवार की हरसंभव मदद करेंगे। इस मौके पर ओखला व महरौली के विधायक भी मौजूद रहे। वहीं, छात्रों ने सोमवार को कुलपति कार्यालय के बाहर भी विरोध दर्ज करवाते हुए तीनों आरोपी छात्रों पर कार्रवाई की मांग रखी।
‘केजरीवाल ने जांच के लिए कमेटी क्यों नहीं की गठित’
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व संयुक्त सचिव और एबीवीपी पदाधिकारी सौरभ शर्मा ने केजरीवाल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि 9 फरवरी की घटना के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने एक न्यायिक जांच कमेटी गठित की थी। वहीं, छात्रसंघ और नजीब के परिवार से मिलने के बाद उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की बात क्यों नहीं की। जबकि हम सबकी पहली प्राथमिकता नजीब की सुरक्षित वापसी है। ये सब एक राजनीतिक प्रयास था, क्योंकि इस प्रतिनिधिमंडल में उमर खालिद भी मौजूद था।