फिरोजशाह रोड से शास्त्री भवन तक सड़कों के दोनों तरफ प्रदर्शन को देखने के लिए लोग जुटे रहे। छात्र भी आम लोगों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए उन्हें देखते ही पोस्टर उनकी ओर कर देते, जिस पर कई संदेश लिखे हुए थे। रास्ते में लोगों ने उनके फोटो और वीडियो भी बनाए।
‘तारे जमीं पर’ के प्रोफेसर का किरदार निभाने वाले एमके रैना छात्रों को समर्थन
फिल्म ‘तारे जमीं पर’ में प्रोफेसर का किरदार निभाने वाले एमके रैना भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। कैंपस में हिंसा बेहद ही निंदनीय है, इसलिए वे इन छात्रों के समर्थन में पहुंचे हैं।
महापुरुषों की भी आई याद
जेएनयू में पिछले एक महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शन में अब लाल झंडे के बीच महापुरुषों के कटआउट व पोस्टर भी शामिल किए जा रहे हैं। प्रदर्शन में छात्रों ने शहीद भगत सिंह, सुखेदव, राजगुरु महात्मा गांधी, रामप्रसाद विस्मिल, अशफाक उल्ला खान, बाबा साहेब अंबेडकर व डॉ. अबुल कलाम आजाद की शिक्षाओं को याद दिलाया।
जेएनयू हिंसा के पीछे कुलपति हैं, इसलिए अब कुलपति का इस्तीफा नहीं, उसे बर्खास्त भी करना होगा। मोदी सरकार किसी की आवाज नहीं सुनती पर जेएनयू छात्रों के चलते सरकार उनकी बात सुनने के लिए बार-बार उनको बुला रही है। छात्रों की यही ताकत लोकतंत्र की ताकत है।
-सीताराम येचुरी, पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष व वामपंथी नेता
जेएनयू छात्रों ने सरकार को झुकाया
जेएनयू छात्रों ने मोदी सरकार को झुकनेे पर मजबूर कर दिया है। हार के बाद लगता था कि अब हमारी बात कौन सुनेगा, लेकिन जेएनयू के चलते आज सरकार इनकी आवाज सुनने को विवश है। जेएनयू के चलते देशभर के युवा सड़कों पर आ चुके हैं।
-प्रो. मनोज झा, डीयू प्रोफेसर, राज्यसभा सांसद
कुलपति व गृहमंत्री ही जेएनयू साजिश के पीछे
जेएनयू हिंसा सोची-समझी साजिश है। इस साजिश के पीछे कुलपति और गृहमंत्री हैं, क्योंकि इन्हीं के इशारे पर पुलिस कैंपस के अंदर नहीं गई। पुलिस को समय से सूचना नहीं दी। हालांकि नकाबपोश एबीवीपी के गुंडों ने जब छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष पर हमला किया तो चार मिनट बाद वसंत विहार थाने में मामला जरूर दर्ज हो जाता है।
-कन्हैया कुमार, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष