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छात्रा का शोषण करने वाला प्रोफेसर बर्खास्त

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छात्रा के शारीरिक शोषण व छेड़छाड़ करने वाले सीनियर प्रोफेसर को जेएनयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) ने बर्खास्त करते हुए नियमों के तहत मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया है।
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दोषी प्रोफेसर अब गेस्ट लेक्चर व शोध कार्य में भी सहयोग नहीं कर सकेंगे। काउंसिल ने पीड़ित छात्रा को नए सत्र में पीएचडी डिग्री में दाखिला दिलाने के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी। रिपोर्ट में प्रोफेसर के दोषी पाया गया।
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छात्रा का गाइड था आरोपी प्रोफेसर

काउंसिल ने रिपोर्ट में लिखा था कि उक्त प्रोफेसर को भविष्य में भी कभी कोई लाभ नहीं मिलना चाहिए। हालांकि काउंसिल ने दोषी प्रोफेसर की पेंशन को नहीं रोकने की मांग रखी है, जिसे मान लिया गया है।

मामला अगस्त 2012 का है जब पीड़ित छात्रा ने सीएसआरडी सेंटर के पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लिया था। वहां सीनियर प्रोफेसर छात्रा का गाइड बना था।

उसने उसी समय छात्रा का शारीरिक शोषण करना शुरू कर दिया। छात्रा ने सेंटर समेत विवि प्रबंधन तक इसकी शिकायत की थी।

छात्रा ने खुद दिखाई हिम्मत

शिकायत के दो महीने बाद तक विवि प्रबंधन द्वारा आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर परेशान छात्रा ने खुद को डी रजिस्टर्ड करा लिया।

डी रजिस्टर्ड होने के साथ ही छात्रा ने सितंबर 2012 में जीएस कैश (सुप्रीम कोर्ट की विशाखा गाइडलाइंस के तहत शिक्षण व कामकाजी संस्थाओं में लिंगभेद मामलों पर आधारित कमेटी) को शिकायती पत्र लिखा।

छात्रा का पत्र मिलने के बाद जीएस कैश कमेटी ने पूरे मामले की जांच की। अगस्त 2013 तक जारी जांच के बाद सितंबर 2013 में मामले की रिपोर्ट विवि प्रबंधन को सौंपी गई।
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पहले नहीं हुई थी कार्रवाई

जीएस कैश कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में आरोपी शिक्षकों को दोषी करार दिया था। हालांकि रिपोर्ट के बाद भी सीनियर प्रोफेसर के खिलाफ विवि प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

बाद में छात्रों के दबाव के चलते मामला एग्जीक्यूटिव काउंसिल तक पहुंचा। काउंसिल ने पूरे मामले की जांच कर छह महीने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी, जिसमें प्रोफेसर को दोषी पाया गया।

जेएनयू के कुलपति प्रो. एसके सोपोरी ने कहा कि प्रोफेसर व गाइड के खिलाफ कार्रवाई का फैसला एग्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा दोबारा तैयार किए गए जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। पीड़ित छात्रा ने पीएचडी पूरी करने की मांग की है। वह नए सत्र में नए गाइड के तहत अपनी डिग्री पूरी करेगी।
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