जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
जेएनयू परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण एवं शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करने के आरोप सामने आए हैं। परिसर की दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी’ जैसे नारे लिखे गए हैं। इसके अलावा, सामने आई तस्वीरों में आइसा के कैडर द्वारा वीर सावरकर के चित्र के साथ आपत्तिजनक लेखन किए जाने का मामला भी प्रकाश में आया है।
एबीवीपी की कड़ी प्रतिक्रिया
एबीवीपी जेएनयू इकाई ने वामपंथी छात्र संगठनों और जेएनयूएसयू की राजनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्र हितों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को उठाने के बजाय परिसर में ऐसे नारों को बढ़ावा देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। गौरतलब है कि उमर खालिद वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े राष्ट्र विरोधी षड्यंत्र के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में हैं।
जामिया की दीवारों पर विवाद लेख
जेएनयू की घटना से ठीक एक दिन पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भी इसी तरह दीवारों पर विवादित नारे लिखे पाए गए थे, जिसके बाद से विश्वविद्यालय का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। जामिया में 12 अक्तूबर से छात्र संघ चुनाव की बहाली सहित विभिन्न मांगों को लेकर छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस आंदोलन में जासिम अली, एबिन, रिहान हैदर और रिहान पंवार शामिल हैं।
प्रशासन की पहल
छात्रों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने चुनाव बहाली के लिए नए सिरे से संविधान बनाने हेतु एक समिति का गठन किया है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र समिति के गठन के बजाय सीधे चुनाव कार्यक्रम जारी करने की मांग पर अड़े हुए हैं। शुक्रवार शाम को जामिया प्रशासन की समिति ने छात्रों की मांगों पर दोबारा बातचीत शुरू की है।
आंदोलन को बदनाम करने की साजिश
भूख हड़ताल पर बैठे छात्र रिहान हैदर ने दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने को असामाजिक तत्वों की करतूत बताया है। उन्होंने इसे छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। स्थिति को देखते हुए कैंपस में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और प्रशासन विवादित नारे लिखने वालों की पहचान कर उचित कार्रवाई करने में जुटा है।