जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने केंद्र सरकार से कैंपस में हुए पुलिस लाठीचार्ज व तोड़फोड़ मामले की उच्चस्तरीय समिति या न्यायिक जांच की मांग की है। जामिया के रजिस्ट्रार (आईपीएस) एपी सिद्दीकी की ओर से सरकार को 20 दिसंबर को पत्र लिखा गया है।
रजिस्ट्रार ने तीन बिंदुओं पर जांच की मांग की है। इसमें कैंपस परिसर में विश्वविद्यालय प्रशासन की मंजूरी के बगैर पुलिस की एंट्री, लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने व लाइब्रेरी के बाहर खड़े दोपहिया वाहन को क्षतिग्रस्त करना शामिल हैं।
सिद्दीकी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी को पत्र भेजा है। अपनी शिकायत में रजिस्ट्रार ने लिखा है कि जामिया ने 15 और 16 दिसंबर को मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेजी है। इसके अलावा कुलपति प्रो. नजमा अख्तर ने स्वयं इस पूरे मामले पर ब्रीफिंग की है। इसलिए अनुरोध हैं कि जामिया मामले में तीन बिंदुओं पर निर्धारित समयावधि में उच्चस्तरीय समिति या फिर न्यायिक जांच कराई जाएं।
रिपोर्ट में रजिस्ट्रार ने 15 दिसंबर यानी रविवार की घटना की जानकारी दी। इसमें बताया है कि बड़ी संख्या में विभिन्न इलाकों की भीड़ कैंपस के बाहरी सड़क, जुलैना व मथुरा रोड पर जुटी थी। पुलिस ने उग्र भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस व लाठीचार्ज का प्रयोग किया। जब भीड़ मौलाना मोहम्मद अली जौहर मार्ग (कैंपस के बीच से गुजरने वाली आम सड़क) की ओर से लौटने लगी पुलिस उनका पीछा करते हुए कैंपस के अंदर दाखिल हो गई। पुलिस ने उपद्रवियों के बजाय लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया और तोड़फोड़ की। इसके अलावा पुलिस ने कैंपस में भी छात्रों को बाहर निकालकर पीटा।