सेक्टर-31 स्थित जीवनदान अस्पताल में डिलीवरी के दौरान महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को दोषी करार देते हुए लाइसेंस रद्द कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अस्पताल के पास हड्डी विभाग शुरू करने का लाइसेंस था। लेकिन वहां डिलीवरी कराई जा रही थी। जांच में अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया गया है। विभाग का कहना है कि अस्पताल की तरफ से जांच में पूरी तरह से सहयोग नहीं किया गया।
जीवनदान अस्पताल में जून के प्रथम सप्ताह में डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत हो गई थी। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया था। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए अस्पताल में पहुंची थी। इस दौरान परिजनों ने काफी हंगामा किया था।
सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव ने बताया कि जांच में अस्पताल प्रबंधन की गलती सामने आई है। हड्डी रोग विशेषज्ञ के नाम से अस्पताल का पंजीकरण किया गया था। लेकिन वहां डिलीवरी कराई जा रही थी।
डॉक्टर होने के बावजूद इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं। इसके साथ ही महिला की मौत के मामले में जीवनदान अस्पताल प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग में बुलाया गया था। लेकिन अस्पताल की टीम बहुत बाद में आई है। इसलिए अस्पताल का लाइसेंस कैंसल कर नोटिस भेज दिया गया है।