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झारखंड विधायक मामला: बंगाल सीआईडी का दिल्ली पुलिस पर आरोप- एमएलए की संपत्ति पर छापेमारी से रोका

Thu, 04 Aug 2022 07:57 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दक्षिण-पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त मनोज सी ने बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम दक्षिण-पश्चिमी इलाके में तलाशी वारंट के अमल के लिए बुधवार सुबह पहुंची थी। दिल्ली पुलिस ने शुरू में तलाशी वारंट की तामील करने के लिए सभी सहायता दी थी। जांच के दौरान तलाशी वारंट के अमल के दौरान कुछ कानूनी विसंगतियां देखी गईं।
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दिल्ली पुलिस - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो
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विस्तार
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हावड़ा में भारी नकदी के साथ पकड़े गए झारखंड के तीन विधायकों को लेकर अब पश्चिमी बंगाल सीआईडी व दिल्ली पुलिस सामने-सामने आ गई है। पश्चिमी बंगाल सीआईडी के अफसरों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनकी टीम को उनमें से एक विधायक की दिल्ली स्थित संपत्ति पर छापा मारने से रोक दिया। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि तलाशी वारंट में कानूनी विसंगतियां देखी गई हैं। इस कारण तलाश वारंट को अमल करने से रोका गया था।

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पश्चिम बंगाल पुलिस ने झारखंड के कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल कोंगारी को 49 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। जिस कार में वह जा रहे थे उसी कार से पैसे बरामद किए गए थे। दिल्ली आए पश्चिमी बंगाल सीआईडी के इंस्पेक्टर अरिजीत भट्टाचार्य ने बताया कि इन विधायकों से पूछताछ में साउथ कैंपस थाना इलाके में रहने वाले सिद्धार्थ मजूमदार का नाम सामने आया था।

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उन्होंने बताया कि जांच में पता लगा कि सिद्धार्थ मजूमदार के यहां तलाशी लेने पर कुछ कागजात बरामद हो सकते हैं। यह दस्तावेज नकदी से संबंधित हो सकते हैं। वह सिद्धार्थ मजूमदार के घर की तलाशी लेने के लिए वारंट लेकर आए थे। दिल्ली पुलिस ने पश्चिम बंगाल सीआईडी को सिद्धार्थ मजूमदार के घर की तलाशी लेने से रोक दिया। इस तरह से रोका जाना पूरी तरह से अवैध है।

दक्षिण-पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त मनोज सी ने बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम दक्षिण-पश्चिमी इलाके में तलाशी वारंट के अमल के लिए बुधवार सुबह पहुंची थी। दिल्ली पुलिस ने शुरू में तलाशी वारंट की तामील करने के लिए सभी सहायता दी थी। जांच के दौरान तलाशी वारंट के अमल के दौरान कुछ कानूनी विसंगतियां देखी गईं। इसके बाद कानूनी राय ली गई। कानूनी राय लेने के बाद पता लगा कि वारंट अमल करने लायक नहीं है। इसकी सूचना पश्चिम बंगाल पुलिस को दी गई।

दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस अधिकारी का नाम तलाशी वारंट में है उसके बदले कोई दूसरा जांच अधिकारी दिल्ली आया था। सीआरपीसी की धारा 96 के तहत वारंट के तहत तलाशी अभियान बिना जांच अधिकारी के नहीं चलाया जा सकता।
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