जेवर-बुलंदशहर हाईवे पर 24 मई की रात लूटपाट, चार महिलाओं से गैंगरेप व विरोध करने पर स्क्रैप व्यापारी की हत्या के बाद से अब तक पुलिस आरोपियों की पहचान नहीं कर पाई है। इससे वारदात में घुमंतू गिरोह के शामिल होने का शक पुख्ता होने लगा है। वारदात के समय बदमाशों की भाषा, टिप्पणी और वारदात की शैली से पुलिस काफी गुमराह हो चुकी है, ऐसे में उन्हें पकड़ने की चुनौती बढ़ गई है।
वारदात के खुलासे के लिए सीएम ने सख्त निर्देश दिए हैं। वारदात के खुलासे के लिए एसटीएफ, एंटी एक्सटॉर्शन सेल, एंटी रॉबरी, साइबर क्राइम, सर्विलांस आदि टीमें जुटी हैं। राजस्थान, हरियाणा के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश व आसपास के जिले व कस्बों में भी पड़ताल की गई है। पुलिस ने 20 से अधिक गिरोह और 150 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की है।
यहां तक कि कुछ बावरिया गिरोह के सदस्यों से भी पूछताछ की, लेकिन अब तक बदमाशों की पहचान नहीं हो पाई है। बताया गया है कि घुमंतू गिरोह अलग-अलग स्थानों व प्रदेश में रहने के कारण कई भाषा से वाकिफ हो जाता है।
वारदात के दौरान भी वह अलग भाषा का प्रयोग कर लोगों को गुमराह करता है। जेवर कांड में भी दो युवकों ने हरियाणवी भाषा का इस्तेमाल किया था। साथ ही वारदात के दौरान गिरोह कुछ न ऐसी टिप्पणी करता है, जिसे सुनकर पीड़ित को ध्यान और जानकारी होने पर पुलिस की जांच दूसरी दिशा में चली जाती है। जेवर कांड के दौरान बदमाशों से भिड़ने वाले बुजुर्ग नौबत से बदमाशों ने कहा था कि बाबा तुम बीच में मत आओ, इनसे तो हमारी रंजिश है।’
इसके बाद पीड़ितों ने पड़ोसियों पर आरोप लगाया था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। इसके अलावा जेवर कांड में भी एक बदमाश ने दूसरे को जसबीर नाम से संबोधित किया था।
पुलिस जसबीर नाम के बदमाशों को तलाशती रही। वहीं, गिरोह के सदस्य बार-बार अपना नाम बदलते हैं। इसके अलावा ज्यादा समय तक एक स्थान पर नहीं रुकने की वजह से उन्हें तलाश करना मुश्किल हो जाता है।