जीव दया संस्थान ने 500 बकरों की जान बचाकर अपना पहला स्थापना दिवस मनाया। संस्था के अनुसार, ईद से पहले बकरों को बाजार से उचित भाव पर खरीद कर उनके द्वारा बनाई गई बकरा शाला में लाया गया था।
बागपत स्थित प्राचीन जैन धर्म नगरी अमीनगर सराय की पावन धरा पर जीव दया संस्थान (बकरा शाला) का वार्षिक महोत्सव हर्षोल्लाह के साथ मनाया गया। जीव दया संस्थान ने 500 बकरों की जान बचाकर अपना पहला स्थापना दिवस मनाया। संस्था के अनुसार, ईद से पहले बकरों को बाजार से उचित भाव पर खरीद कर बकरा शाला में लाया गया था। जहां उनका लालन-पालन किया जा रहा है। हर तरह की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है।
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संस्था के अध्यक्ष मनोज ने बताया कि जब बकरों का आखिरी समय नजदीक आ जाता है और डॉक्टर यह कह देता है कि कुछ ही घंटे या मिनट में इनका जीवन पूरा हो जाएगा, तब उनके आहार का त्याग कराकर और णमोकार मंत्र सुनते हुए उनकी आखिरी सांस पूरी होती है। कहा गया है जो जीव णमोकार मंत्र या धर्म सुनते हुए आखिरी सांस लेता है उसको सीधी देवगती प्राप्त होती है। इस प्रकार जीव दया संस्थान इस भव में उनकी सेवा करती है।
मनोज जैन ने बताया कि आराध्य गुरुदेव श्री सुदर्शन लाल जी महाराज के वरिष्ठ शिष्य श्री राज ऋषि जी महाराज की प्रेरणा से जीव दया संस्थान की शुरुआत की गई। उन्होंने संस्थान की शुरुआत अमीनगर सराय में लगभग 8 साल पहले की थी। अब इस पहल ने बड़ा आकार ले लिया है और 4500 गज जगह में इस नई बकराशाला को निर्मित किया गया है। जिसमें अब हजारों बकरे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीव दया संस्थान ने पक्षियों के लिए अस्पताल तैयार कराया है।