मीनल कहती हैं कि जेईई एडवांस की पढ़ायी के दौरान हर कोई तनाव की बातें करता था, लेकिन कोटा में रहकर मैंने देखा कि सपने आसमां से भी ऊंचे होते हैं, लेकिन कई बार सपने जब हाथ से छूटने लगते हैं तो जिंदगियां (छात्र आत्महत्या कर लेते हैं)हार जाती हैं?
हालांकि मैं जब तनाव से गुजरती थी तो टीवी में भारतीय सीरियल सास-बहू ड्रामा देख सब भूल जाती थी। इसके अलावा स्पोट्र्स से भी जुड़ी रही, क्योंकि टीवी जहां मानसिक रूप से फिट तो स्पोट्र्स मुझे शारीरिक फिटनेस देता था।
हर टॉपर एक ही बात कहते हैं कि आठ घंटे, दस घंटे, चौदह घंटे पढ़ायी की तो सफलता मिली, लेकिन मेरी सोच यहां थोड़ी अलग है। क्योंकि मैंने सूई को कभी अपनी गति नहीं बनने दिया।
मेरा जब दिल करता था, मैं किताब लेकर अपनी पढ़ायी शुरू कर देती थी। पढ़ायी के लिए मैंने कोई टाइम टेबल नहीं बनाया था, बल्कि बस जब दिल किया, किताब खोलकर पढ़ायी शुरू कर दी। ऐसा कोई तय नहीं था कि मुझे आठ घंटे या दस घंटे या एक घंटे पढ़ायी करनी है।