शासन-प्रशासन की सख्ती के आगे झुके जाट नेताओं ने सोमवार को डीसी कार्यालय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जाट नेता रामकिशन मलिक की अगुवाई में मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन जिला राजस्व अधिकारी को सौंपा गया।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव रामकिशन मलिक कहना था कि जाट आरक्षण पर न्यायालय की ओर से रोक लगाई गई है।
अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह न्यायालय में आरक्षण की बेहतर ढंग से पैरवी करे। उन्होंने कहा कि सविंधान में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े नागरिकों के वर्ग को आरक्षण देने की बात कही गई है न कि आर्थिक रूप से पिछड़े को।
जाट सामाजिक और शैक्षिक दोनों ही रूप से पिछड़े हुए हैं। चंद लोगों की आर्थिक संपन्नता का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि पूरा समाज ही संपन्न है।
मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में फरवरी में हुए आंदोलन के दौरान गिरफ्तार युवाओं के बिना शर्त छोडने की मांग की गई। इसके अलावा गोलीबारी में मारे गए 18 लोगों के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई।
जाट नेता यशपाल मलिक पर लगाए गए देशद्रोह के केस को वापस लेने, और हाईकोर्ट में आरक्षण देने की पैरवी करने की मांग थीं। डीसी चंद्रशेखर के नहीं मिलने पर रामकिशन मलिक ने ज्ञापन जिला राजस्व अधिकारी को सौंपा।