जाट आरक्षण आंदोलन के कारण देश भर में मारुति कारों की वेटिंग काफी बढ़ गई है। इसका सबसे अधिक प्रभाव सियाज और बलीनों मॉडल की कारों पर पड़ा है। मारुति प्रबंधन के मुताबिक इनकी वेटिंग ढाई से छह माह तक की हो गई है।
जिन लोगों ने इनकी बुकिंग करा ली थी या करवाने का मन बना रहे हैं उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है। गुडग़ांव में मारुति के दोनों प्लांटों में सोमवार को एक भी कार नहीं बन सकी। मंगलवार को काम शुरू होने की संभावना है तब तक करीब दस हजार कारों का नुकसान हो चुका होगा।
इस समय देश भर में मारुति की सियाज और बलीनो कारों की सबसे अधिक डिमांड बताई गई है। सियाज पर ढाई और बलीनों पर छह माह की वेटिंग जाट आरक्षण आंदोलन के कारण हो गई है। गुडग़ांव से बनी मारुति की कारें कश्मीर से कन्याकुमारी तक भेजी जाती हैं।
रोहन मोटर्स के जनरल मैनेजर चेतन अरोड़ा का कहना है कि सिर्फ सियाज और बलीनों पर ही नहीं डिजायर, स्विफ्ट और वैगनॉर की भी वेटिंग में इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि वैगनार पेट्रोल कार पर एक माह और सीएनजी पर डेढ़ माह की वेटिंग है। वहीं डिजायर पर चार सप्ताह की वेटिंग हो गई है। वहीं स्विफ्ट के सीएनजी मॉडल पर डेढ और पेट्रोल पर दो माह की वेटिंग है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति रोजाना 5000 कारों का उत्पादन करती है। शनिवार को मारुति के सेक्टर-18 और मानेसर प्लांट में सिर्फ ढाई हजार कारें निर्मित हो सकी थीं। रविवार को छुट्टी थी और सोमवार को दोनों प्लांटों में एक भी कार का उत्पादन नहीं हो सका।
मंगलवार को शिफ्ट का काम बंद रहेगा। इस कारण सिर्फ ढाई हजार कारों का उत्पादन मारुति द्वारा किया जाएगा। इस तरह से जाट आंदोलन के कारण मारुति को 10 हजार कारों का नुकसान होगा। इसकी भरपाई कैसे की जाए इसके लिए प्रबंधन की ओर से विचार किया जा रहा है।
मारुति के कंपटीटर उठा सकते हैं फायदा...
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान हालात का फायदा मारुति की कंपटीटर कंपनियां उठा सकती हैं। इसमें हुंडई और होंडा का नाम सबसे ऊपर है।