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जंतर-मंतर हिंसा: पहली एफआईआर में 'बड़ी साजिश' का दावा, जांच स्पेशल सेल को सौंपी

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एफआईआर में आप नेताओं के मार्गदर्शन में हिंसा भड़काने का आरोप, सीसीटीवी व डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की बात
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दंगा, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, हथियार छीनने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान समेत 15 गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दर्ज पहली एफआईआर से कई अहम दावे सामने आए हैं। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि पूरी हिंसा आम आदमी पार्टी (आप) के मार्गदर्शन में सीजेपी के प्रमुख नेताओं द्वारा असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल कर कराई गई। एफआईआर के अनुसार, इन लोगों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के जरिए की जा सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश पर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) राजेश कुमार ने जांच स्पेशल सेल को सौंप दी है।
20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े 20 मामलों में यह पहली एफआईआर 21 जुलाई को नई दिल्ली जिले के संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई। संसद मार्ग थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर इंद्रजीत की शिकायत पर दर्ज इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव (पीडीपीपी) अधिनियम की कम से कम 15 धाराएं लगाई गई हैं। इनमें दंगा, आपराधिक साजिश, हत्या का प्रयास, पुलिसकर्मियों को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला, सरकारी कर्मचारी को गंभीर चोट पहुंचाना, बलपूर्वक हथियार छीनना और गैर-कानूनी जमावड़ा जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
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एफआईआर के अनुसार, शुरुआती जांच में घटनाक्रम का सिलसिला 16 मई को सीजेपी के गठन से शुरू होकर 20 जुलाई की रात करीब 10 से 11 बजे तक जुड़ता है। आरोप है कि इसी दौरान आप के कई नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित किया, जिसके बाद भीड़ आक्रामक हो गई। प्राथमिकी में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ा, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला किया तथा सार्वजनिक संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाया।
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया यह घटनाक्रम किसी अचानक हुई प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि पहले से रची गई सुनियोजित साजिश प्रतीत होता है। इसमें आर्थिक मदद, लोगों को भड़काने, भीड़ जुटाने और एक राजनीतिक संगठन की संभावित भूमिका की भी जांच की आवश्यकता बताई गई है।
शिकायतकर्ता ने एफआईआर में कहा है कि अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिका, वास्तविक साजिशकर्ताओं, उनके सहयोगियों, धन के स्रोत, डिजिटल और सोशल मीडिया के दुरुपयोग तथा भड़काऊ और गुमराह करने वाले संदेश फैलाने वालों की जवाबदेही तय करने के लिए विस्तृत, निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
एफआईआर के अनुसार, 20 जुलाई की रात सीजेपी प्रमुख के संसद मार्च के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचे। आरोप है कि भीड़ में मौजूद हिंसक और असामाजिक तत्व प्रदर्शनकारियों को लगातार उकसाते रहे। उनके द्वारा लोगों से पत्थरों और डंडों से सुरक्षाकर्मियों के सिर पर हमला करने के लिए कहा गया तथा कथित तौर पर यह भी कहा गया कि जीत तभी होगी जब सुरक्षाकर्मियों के सिर पर चोट लगेगी और वे मारे जाएंगे।
प्राथमिकी में आगे आरोप लगाया गया है कि इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया और जानलेवा हमला किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए। आरोप है कि हवलदार मुकुंद पर हमला कर उनका हथियार और गोला-बारूद छीन लिया गया तथा अन्य पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने की भी कोशिश की गई। मामले की प्रारंभिक जांच संसद मार्ग थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार को सौंपी गई थी, जिसे बाद में स्पेशल सेल को स्थानांतरित कर दिया गया।

इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
धारा 223 - सरकारी कर्मचारी के आदेश का पालन न करना
धारा 221 - सरकारी कर्मचारी को उसके कार्य में बाधा पहुंचाना
धारा 132 - सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
धारा 121 - सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए जान-बूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाना
धारा 181 - गैर-कानूनी जमावड़ा
धारा 190 - गैर-कानूनी जमावड़े का प्रत्येक सदस्य अपराध का दोषी
धारा 191(2)(3) - दंगा करना तथा घातक हथियार रखना
धारा 192 - दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना
धारा 324 - शरारत/नुकसान पहुंचाना
धारा 109 - हत्या का प्रयास
धारा 125 - दूसरों की जान या सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य
धारा 61 - आपराधिक साजिश
आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-एबी) - बलपूर्वक पुलिस या सशस्त्र बल से हथियार छीनना
पीडीपीपी एक्ट - धारा 3

10-11 हजार की भीड़, हिंसा के लिए उकसाने का आरोप

एफआईआर के अनुसार, 20 जुलाई की रात प्रदर्शन स्थल पर 10 से 11 हजार लोग जुटे थे। आरोप है कि भीड़ में शामिल असामाजिक तत्व प्रदर्शनकारियों को लगातार सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और डंडों से हमला करने के लिए उकसा रहे थे। प्राथमिकी में दावा किया गया है कि लोगों को सुरक्षाबलों के सिर पर वार करने और उन्हें जान से मारने तक के लिए भड़काया गया।
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हवलदार से हथियार छीनने का आरोप

प्राथमिकी के मुताबिक, हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हवलदार मुकुंद पर हमला कर उनका हथियार और गोला-बारूद छीन लिया। साथ ही अन्य पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने का भी प्रयास किया गया। एफआईआर में इसे सुरक्षाबलों पर सुनियोजित और जानलेवा हमला बताया गया है।
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