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चौथा लोकसभा चुनाव 1967: पहली बार दिल्ली में जनसंघ ने मारा सिक्सर, 7 में से 6 सीटों पर किया था कब्जा

Sat, 30 Mar 2024 04:25 AM IST
विजय पुंडीर विनोद डबास, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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चौथा लोकसभा चुनाव दिल्ली के चुनावी इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। जनसंघ ने पहली बार राजधानी में सिक्सर मारा। बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पार्टी ने सात में छह संसदीय क्षेत्रों पर कब्जा किया। वहीं, कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

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कांग्रेस के खाते में महज एक सीट आई ,उसमें भी जीत का अंतर कम था। दिलचस्प यह कि इसी चुनाव से मौजूदा सांसदों के हारने का सिलसिला भी शुरू हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के तीन सांसदों को हार का सामना करना पड़ा था। हैट्रिक लगा चुके कांग्रेस नेता नवल प्रभाकर चौथी बार संसद नहीं पहुंच सके। वहीं, नई दिल्ली क्षेत्र से मीर चंद खन्ना व चांदनी चौक क्षेत्र से श्याम नाथ की भी चुनाव में हार हुई। कांग्रेस की लाज दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश नेे रखी। वह लगातार दूसरी बार सांसद बने। पहली बार सदर से और दूसरी बार बाहरी दिल्ली सेे।

31 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी
चौथे चुनाव में 46 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी और उनमें से 15 उम्मीदवारों की जमानत बची थी। सातों सीटों पर पहले व दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ चांदनी चौक क्षेत्र में तीसरे नंबर पर रहेे उम्मीदवार की भी जमानत बच गई थी। लिहाजा इस चुनाव में 31 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
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दिल्ली में एक बार फिर सीटों की संख्या बढ़ी थी
इस चुनाव के दौरान दिल्ली में एक बार फिर सीटों की संख्या में इजाफा किया था। इस दौरान सात सीटें की गई थीं। पूर्वी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली नाम से नई सीटें बनाई गई थी। पहले लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में तीन सीट थी, जबकि दूसरे चुनाव के दौरान एक सीट बढ़ा दी गई थी। इसी तरह तीसरे चुनाव से पहले भी एक सीट बढ़ाई गई थी।

इंदिरा गांधी और ब्रह्मप्रकाश में टकराव से कांग्रेस हारी
इस चुनाव में कांग्रेस पूरे देश में जीती थी, लेकिन दिल्ली में उसे हार का सामना करना पड़ा था। इसके पीछे इंदिरा गांधी और चौधरी ब्रह्मप्रकाश के बीच टकराव होना मुख्य कारण रहा था। वर्ष 1952 में दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने चौ. ब्रह्मप्रकाश इस चुनाव तक कांग्रेस के कद्दावर नेता बन चुके थे और उन्होंने सभी सीटों पर अपनी पसंद के नेताओं को टिकट दिलवाने की सिफारिश थी। इंदिरा गांधी ने उनको तो टिकट दे दिया था, मगर अन्य सीटों पर अपनी मर्जी से टिकट दिए थे। इस कारण चौ. ब्रह्मप्रकाश नाराज हो गए थे और वे छह सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को हरवाने में लग गए थे। इस चुनाव के बाद उन्होंने कांग्रेस से नाता भी तोड़ दिया था।

कांग्रेस से टिकट न मिलने पर नायर हो गए थे बागी
पहले व दूसरे लोकसभा चुनाव में बाहरी दिल्ली से कांग्रेस के सांसद चुने गए सीके नायर ने इस चुनाव में कांग्रेस से टिकट मांगा था, लेकिन कांग्रेस ने उनको टिकट नहीं दिया था। इस कारण उन्होंने कांग्रेस से बगावत कर दी थी और वह बाहरी दिल्ली क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे थे। उनकी जमानत भी नहीं बच पाई थी।
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चौथे चुनाव का परिणाम
    क्षेत्र           जीत              दल
नई दिल्ली   एमएस सोंधी      जनसंघ
दक्षिण दिल्ली     बलराज मधोक  जनसंघ
बाहरी दिल्ली      चौ. ब्रह्मप्रकाश  कांग्रेस
पूर्वी दिल्ली     एच देवगन       जनसंघ
चांदनी चौक  आर गोपाल        जनसंघ
दिल्ली सदर  केएल गुप्ता            जनसंघ
करोल बाग    आरएस विद्यार्थी   जनसंघ

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