सोशल मीडिया पर जामिया में पुलिस की कार्रवाई का वीडियो जारी होने पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि दिल्ली चुनाव के बाद वीडियो सामने आने के पीछे कोई बड़ी साजिश है। सुबह से ही लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे थे। शाम तक तीन अन्य वीडियो वायरल होने के बाद स्थिति कुछ बदली। कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन शुरू कर दिया।
पुलिस के लाठीचार्ज का वीडियो वायरल होने के बाद साफ हो गया कि बेकसूर छात्रों पर बेवजह लाठियां बरसाई गई हैं। वीडियो की जांच कराकर आरोपी पुलिसवालों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।- जामिया कोर्डिनेशन कमेटी
जामिया की डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी में लाठीचार्ज का वीडियो यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी नहीं किया गया है। जामिया कोर्डिनेशन कमेटी की ओर से इसे जारी किया गया है, जिसके सदस्य सीएए के विरोध में गेट नंबर-7 पर धरने पर बैैठे हैैं। इस कमेटी के बयानों को यूनिवर्सिटी से न जोड़ा जाए। कुछ दिन से सोशल मीडिया पर जामिया के नाम से कुछ ऑफिशियल अकाउंट का दावा किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। लोगों से गुजारिश है कि जामिया के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट की सूचना को ही सत्य मानें। ट्विटर से आग्रह किया गया है कि वह जामिया के अधिकृत ट्विटर हैंडल को वेरीफाई करे।- अहमद अजीम, जामिया पीआरओ।
जामिया की लाइब्रेरी में पुलिस कार्रवाई का वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई कार्रवाई न हुई तो सरकार की मंशा भी साफ हो जाएगी। प्रियंका ने यह ट्वीट हिंदी में किया है।
पुलिस का व्यवहार बेहद अनुचित है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालयों में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई झूठ और गलत तथ्यों के सहारे राजनीतिक उद्देश्यों से की जा रही है। दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्री अमित शाह के आधीन है। वे लाइब्रेरी में पढ़ने वाले अपने युवा विद्यार्थियों से ऐसा व्यवहार करते हैं। शर्म।- सीताराम येचुरी, सीपीआईएम महासचिव
जांच एजेंसियों को वायरल वीडियो का इस्तेमाल करके अपनी जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। दंगाइयों के लिए बेहतर है कि वे अपनी पहचान खुद ही बता दें। लाइब्रेरी में नकाबपोश बंद किताबों को पढ़ते दिख हैं। किताबों के बजाय उनकी नजर प्रवेश द्वार की ओर लगी है। क्या लाइब्रेरी पथराव के बाद दंगाइयों के छिपने की जगह है।- अमित मालवीय, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख