प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए मुख्य मुद्दे
जामिया नगर स्थित स्येदा मंजिल में 'जामिया कलेक्टिव' द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ तीखी नाराजगी जताई। छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगें रखीं और चिंताएं व्यक्त कीं।
निश्चित चुनाव तिथि
छात्रों का कहना है कि साल 2006 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं, इसलिए प्रशासन को टालमटोल करने के बजाय चुनाव की स्पष्ट और समयबद्ध तारीख घोषित करनी चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारियों के इस्तीफे की मांग
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े छात्रों और वक्ताओं ने सुरक्षा सलाहकार के पद को समाप्त करने और मुख्य प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पद का इस्तेमाल छात्रों की निगरानी के लिए किया जा रहा है।
अन्य प्रमुख मांगें
संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति में छात्रों को प्रतिनिधित्व देना, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को पूरी तरह वापस लेना और छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की जांच करना।
चुनाव का आदेश
विश्वविद्यालय ने सोमवार को आदेश दिया था कि छात्र संघ का संविधान स्वीकृत होने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही, विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन और शो-कॉज़ नोटिस को भी रद्द कर दिया गया है। परिसर में सुरक्षा और तनाव के माहौल को देखते हुए 24 अक्तूबर से सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया गया है।
आंदोलन जारी है
इस महीने की शुरुआत में शुरू हुए इस आंदोलन के तहत चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। पूर्व छात्रों और वक्ताओं ने जोर देकर कहा है कि प्रशासन को छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और एक निर्वाचित प्रतिनिधि निकाय सुनिश्चित करना चाहिए ताकि छात्र अपनी आवाज बेबाकी से उठा सकें।