फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अध्ययन में खुलासा: किडनी मरीजों में डायलिसिस की संख्या भी कम कर रही नीरी केएफटी दवा

Thu, 02 Sep 2021 01:49 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आयुर्वेद में शामिल जड़ी बूटियों के जरिए न सिर्फ किडनी को वापस से क्षमतावान बनाया जा सकता है बल्कि किडनी डायलिसिस की संख्या को भी कम किया जा सकता है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आयुर्वेद में शामिल जड़ी बूटियों के जरिए न सिर्फ किडनी को वापस से क्षमतावान बनाया जा सकता है बल्कि किडनी डायलिसिस की संख्या को भी कम किया जा सकता है। आयुष दवा नीरी केएफटी इन दोनों ही कार्य को बखूबी निभा रही है। इसमें मौजूद पुनर्नवा और पाषाणभेद सहित 20 से भी ज्यादा औषधियों के मरीजों में काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

विज्ञापन


यह जानकारी सऊदी जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में सामने आई है जिसे नई दिल्ली स्थित जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के विशेषज्ञों ने हाल ही में पूरा किया है। 

विशेषज्ञों की टीम में शामिल डॉ. गौरव गौतम ने बताया कि नीरी केएफटी के जरिए किडनी की सूक्ष्म संरचना और कार्यप्रणाली का उपचार किया जा सकता है। क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) रोगियों में क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड की मात्रा कमी होती मिली है। जबकि जिन दूसरे समूहों को यह दवा नहीं दी गई, उनमें किसी भी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिला।
विज्ञापन


साइंस डायरेक्ट, गुगल स्कालर, एल्सेवियर, पबमेड और स्प्रिंजर साइंस जर्नल के डेटाबेस के आधार पर विशेषज्ञों ने सबसे पहले किडनी से जुड़े रिसर्च पेपर की समीक्षा की जो हर्बल दवाओं पर प्रकाशित हुए हैं। इसके बाद नीरी केएफटी का चयन किया जिसे भारतीय वैज्ञानिकों के सहयोग से एमिल फार्मास्युटिकल्स ने तैयार किया। एमिल के चेयरमैन केके शर्मा ने बताया कि यदि समय रहते इस दवा का इस्तेमाल शुरू हो जाए तो किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है। 

वहीं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रो. कमल नयन द्विवेदी का कहना है कि इस दवा में एंटी ऑक्सीडेंट के अलावा कई प्रभावी औषधियां हैं।इनसे न सिर्फ किडनी बल्कि लिवर को भी मजबूती मिलती है। यह काफी बेहतर और यूनिक दवा है जिसे हमने अपने अध्ययन में भी काफी कारगर पाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें