आपको बता दें कि अचानक हुए हमले से घबराए विद्यार्थी इधर-उधर भागने लगे थे। छात्र-छात्राएं लाइब्रेरी के ऊपरी मंजिल की ओर भागे, लेकिन यहां भी आंसू गैस के चलते छात्रों ही हालत खराब हो गई। कई छात्र लाइब्रेरी की खिड़की के शीशे तोड़कर बाहर निकले। क्योंकि, मुख्य गेट पर पुलिस आंसू गैस के गोल बरसा रही थी।
इसके बाद छात्राओं ने सोशल मीडिया पर ऑडियो और वीडियो अपलोड कर विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस आयुक्त से मदद मांगी थी। इसी से विश्वविद्यालय प्रशासन को लाइब्रेरी में पुलिस के आंसू गैस और लाठीचार्ज की जानकारी मिली थी। उन्होंने तुरंत पुलिस अधिकारियों से कैंपस से बाहर जाने का आदेश दिया था।
बिना अनुमति कैंपस में घुसी पुलिस: चीफ प्रोक्टर
जामिया के चीफ प्रोक्टर वसीम अहमद खान ने आरोप लगाया था कि पुलिस बिना अनुमति कैंपस में घुसी और शिक्षकों व पढ़ाई कर रहे छात्रों को पीटा व उन्हें वहां से बाहर निकाल दिया। विश्वविद्यालय की वीसी नजमा अख्तर ने घटना की निंदा करते कहा कि जो छात्र लाइब्रेरी में थे, उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
वीडियो सामने आने के बाद मामले में दिल्ली पुलिस का बयान आया है। स्पेशल कमिश्नर (क्राइम) प्रवीर रंजन ने कहा है कि हमने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (पुस्तकालय) के नए वीडियो(15 दिसंबर) को संज्ञान में लिया है। जो अभी सामने आया है। हम इसकी जांच करेंगे।
वहीं, कांग्रेस ने भी वीडियो को ट्वीट करते हुए कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि देखिए कैसे दिल्ली पुलिस पढ़ने वाले छात्रों को अंधाधुंध पीट रही है। एक लड़का किताब दिखा रहा है लेकिन पुलिस वाला लाठियां चलाए जा रहा है। गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने झूठ बोला कि उन्होंने लाइब्रेरी में घुसकर किसी को नहीं पीटा।
इस वीडियो को देखने के बाद जामिया में हुई हिंसा को लेकर अगर किसी पर एक्शन नहीं लिया जाता तो सरकर की नीयत पूरी तरह से देश के सामने आ जाएगी।