बादलों की उमड़-घुमड़ सी गूंजती तबले की थाप, बिजली की चमक सी थिरकती नृत्य मुद्राएं और हर मिनट पर तालियों की मूसलाधार बारिश। शनिवार की शाम सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम संगीत की सरिता में डूबा हुआ था। तबले के तिलिस्माती फनकार उस्ताद जाकिर हुसैन और कथक के परम ऊर्जावान साधक पंडित राजेंद्र गंगानी सामने थे।
तबले की तिरकिट और घुंघरुओं की छनछन के बीच संगीतमय संवाद चल रहा था और खचाखच भरा ऑडिटोरियम इस करिश्माई जुगलबंदी का गवाह बन रहा था। सभी के चेहरों पर मंत्रमुग्ध मुस्कुराहटें थीं और जुबान पर वाह-वाह। मौका था रागगीरी के जलसे मास्टर एंड मैस्ट्रो का। इस कार्यक्रम का आयोजन रागगीरी ट्रस्ट और साहित्य कला परिषद, दिल्ली सरकार की तरफ से किया गया था।
कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज और भारत रत्न स्वर्गीय पंडित रविशंकर की पत्नी सुकन्या शंकर ने दीप प्रजव्लिलत करके कार्यक्रम की शुरूआत की। इस दौरान भविष्य आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी के बच्चों ने गणेश वंदना गाई। तमाम शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे इन बच्चों को जब गणेश वंदना के बाद मंच पर लाया गया तो पूरा हॉल तालियों से गूंज गया। हॉल में मौजूद हर शख्स ने इन बच्चों के हौसलों को सलाम किया। रागगीरी ट्रस्ट की तरफ से इन सभी बच्चों को सम्मानित भी किया गया।
इसके बाद जब मंच से परदा हटा तो उस्ताद जाकिर हुसैन सामने थे। उसके बाद उन्होंने तीन ताल में तबले की उठान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कुछ गतें बजाईं, जिसके बाद कुछ टुकड़े। फिर मंच पर आए जयपुर घराने के कथक डांसर संगीत नाटक अकादेमी अवार्ड से सम्मानित पंडित राजेंद्र गंगानी। फिर शुरू हुआ जुगलबंदी का दौर। इधर तबले पर थिरकती उंगलियां उधर पैरों में खनकते घुंघरू। मिश्र जाति का चलन, ताल धमार में परन, चक्रदार परन एक के बाद एक प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं थीं।
उस्ताद जाकिर हुसैन की प्रस्तुति ही कुछ ऐसी थी कि श्रोता तालियां बजाने के लिए मजबूर थे। तबले पर उऩके साथ फतेह सिंह गंगानी भी थे। जिन्होंने जयपुर घराने की कुछ पारंपरिक बंदिशों पर पंडित राजेंद्र गंगानी का बखूबी साथ दिया। गायन पर विजय परिहार, सितार पर विजय शर्मा और बांसुरी पर देवेंद्र राजभट्ट ने संगत की, कार्यक्रम के दौरान ही पंडित राजेंद्र गंगानी ने उनसे वायदा लिया कि जल्दी ही वो दोबारा दिल्ली आएंगे।
इस मौके पर रागगीरी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी शिवेंद्र कुमार सिंह ने कहाकि शास्त्रीय संगीत को आम आदमी तक ले जाना ही उनकी संस्था का मिशन है, इसीलिए रागगीरी ने दुनिया में पहली बार छोटे बच्चों के लिए संगीत की अनोखी किताबें तैयार की हैं। किताबों के अलावा भी रागगीरी ने दिग्गज कलाकारों के मर्चेंटाइज बनाए हैं।