एम्स के बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष ने बताया कि जग्गा और बलिया के ऑपरेशन के बाद उनके सिर को सामान्य आकार देना बड़ी चुनौती थी। इन बच्चों को कई बार प्लास्टिक सर्जरी के तहत ऑपरेशन किया। सिर में त्वचा लगाई। ऑपरेशन के दौरान ये त्वचा न सिकुड़ जाए इसलिए प्लास्टिक प्लेट का इस्तेमाल किया गया। अभी तक इस तरह की प्लेट का इस्तेमाल कभी भी नहीं हुआ है। इसलिए जल्द ही वे इस अध्ययन को इंटरनेशनल प्लास्टिक सर्जरी जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजने वाले भी हैं।
रिसर्च 3: दिमाग के 3डी मॉडल में नसें भी मौजूद
डॉ. दीपक गुप्ता बताते हैं कि इस केस में सबसे बड़ी मदद 3डी मॉडल से मिली। पहली बार दिमाग के 3डी मॉडल में नसों तक का इस्तेमाल किया गया था। ताकि ये पता चले कि टीम को किस स्तर तक काम करना है। इस मॉडल पर दो बार प्रैक्टिस में ही डॉक्टरों को तीन महीने लग गए थे। इस नई रिसर्च के बाद एम्स गंभीर केसों में इसका इस्तेमाल करेगा।
ये दुनिया का सबसे दुर्लभ केस
जग्गा और बलिया की तरह दुनिया भर में साल 1912 से लेकर अब तक 116 केस सामने आए हैं जिनमें से महज 15 ही जीवित हैं। हालांकि इनमें भी जग्गा और बलिया का केस सबसे ज्यादा दुर्लभ है। नौ अप्रैल 2015 को ओड़िशा के आदिवासी क्षेत्र कंधमल में जन्म लेने के बाद से ही ये दोनों भाई अपनी मां के दूध से दूर रहे।
दोनों भाइयों के सिर जुडने के कारण इन्हें जब 14 जुलाई 2017 को दिल्ली एम्स लाया गया तो डॉक्टरों को इलाज की रिसर्च में छह महीने लग गए। 21 जुलाई 2017 को इन्हें पहली बार नौ घंटे 50 मिनट के लिए एनेस्थिसिया (बेहोशी) दिया ताकि इनका सीटीए और एमआरआई हो सके। इसके बाद 28 अगस्त 2017 को 25 घंटे का एनेस्थिसिया दिया।
28 सिंतबर 2017 को सात घंटे, 25 अक्तूबर 2017 को 14 घंटे 15 मिनट जग्गा तो 16 घंटे बलिया को बेहोश रखा गया। इसके अलावा पांच से आठ बार त्वचा ग्राफ्टिंग के लिए भी बेहोश करना पड़ा। 28 अगस्त 2017 को हुए पहले ऑपरेशन में 25 घंटे लगे जबकि 25 अक्तूबर 2017 को दूसरे ऑपरेशन में 20 घंटे लगे। 33 वरिष्ठ डॉक्टर, 42 रेजीडेंट, 50 नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ सहित 125 सदस्यों की मेडिकल टीम इलाज में लगी रही।