सिख दंगों के मामले में आरोपी कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर की ओर से अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखने और माफी मांगने के तर्क पर सिख राजनीति गर्मा गई है।
सिख समुदाय के सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार गुरबचन सिंह ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनके पास टाइटलर का पत्र नहीं आया है और यदि आया तो सभी तख्तों के जत्थेदार से विचार कर तय किया जाएगा कि उन्हें मिलने का समय दिया जाए या नहीं।
गुरुद्वारा रकाबगंज में दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जत्थेदार गुरबचन सिंह ने कहा कि हर किसी को अधिकार है कि वह अकाल तख्त में उनसे मिल सकता है।
समाचार पत्रों से पता चला कि टाइटलर ने उनसे मिलने के लिए समय मांगा है। उन्होंने कहा कि टाइटलर पर गंभीर आरोप है और वे सिखों के कत्लेआम में आरोपी है। इसके अलावा मामला अभी अदालत में विचाराधीन भी है।
यदि टाइटलर का पत्र मिला तो वे सभी पांच प्रमुख तख्तों के जत्थेदारों से विचार विमर्श कर तय करेंगे कि टाइटलर को मिलने का समय दिया जाए या नहीं।
दूसरी तरफ कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके, अवतार सिंह हित इत्यादि अकाली नेताओं ने जत्थेदार से मुलाकात कर ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि टाइटलर पर अब पहली बार कानून का शिकंजा कसा है और वे स्वयं को बचाने के लिए अकाल तख्त के समक्ष पेश होने के लिए उतावले हैं।
एक तरफ टाइटलर माफी मांगने की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह उन्हें निर्दोष बता रहे हैं। उन्होंने संवाददाताओं की उपस्थिति में जत्थेदार से आग्रह किया कि टाइटलर को बुलाने से पहले अन्य धार्मिक पंथ संगठनों से राय कर ही टाइटलर को बुलाया जाए।
यदि उन्हें बुलाया जाता है तो यह भी पूछा जाए कि उन्होंने किस के इशारे पर कत्लेआम किया और कौन-कौन शामिल है। उन्होंने संदेह जताया कि पंजाब के चुनावों में वोट लेने के लिए यह कोई साजिश तो नहीं है।