बिसाहड़ा के मुस्लिम परिवार इस बार बकरीद पर बकरे की कुर्बानी नहीं देंगे। मंगलवार को सिर्फ ईद की नमाज पढ़ी जाएगी। पिछले साल बकरीद के दो दिन बाद इकलाख की हत्या से गांव का माहौल बिगड़ गया था।
इस बार गांव के मुस्लिम समाज ने आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया है। इकलाख का परिवार भी इस बार कुर्बानी नहीं करेगा। मंगलवार को ईद पर गांव के मुस्लिम परिवारों ने गांव में बकरे की कुर्बानी नहीं करने का निर्णय लिया है।
नाम न छापने की शर्त पर गांव के एक मुस्लिम परिवार ने बताया कि कुर्बानी न करने के लिए किसी भी हिंदू परिवार ने उन पर दबाव नहीं बनाया है। यह निर्णय उनका खुद का है। उनका कहना है कि गांव में कुर्बानी करने से किसी तरह का विवाद हो, ये वे लोग भी नहीं चाहते। गांव में शांति बनी रहे, इसी वजह से इस बार कुर्बानी नहीं देंगे।
वहीं इकलाख के भाई जान मोहम्मद का कहना है कि पिछले वर्ष कुर्बानी के विवाद को लेकर ही भाई इकलाख की हत्या कर दी गई थी। भाई की हत्या के गम में परिवार ने कुर्बानी न करने का निर्णय लिया है।
गांव में नहीं बढ़ाया गया पुलिस बल
कई गांव के लोगों ने भी बताया कि इस बार अपने बकरे किसी और को बेच दिए हैं। वहीं, पुलिस प्रशासन की तरफ से अभी तक गांव में पुलिस बल नहीं बढ़ाया है। न ही प्रशासन की तरफ से किसी अधिकारी ने गांव का दौरा किया है। हालांकि, पुलिस और खुफिया तंत्र गांव पर नजरें जमाए हुए हैं।
16 युवक जेल में हैं
पिछले साल बकरीद के बाद गोहत्या के आरोपी इकलाख के घर पर हमला कर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। जबकि उसका दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया था।
मामले में गांव के 16 युवक अभी जेल में है। मौके से बरामद मांस की फारेसिंक रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि होने के बाद ग्रामीण सूरजपाल ने भी इकलाख के परिवार के छह लोगों पर मामला दर्ज है।
बिसाहडा़ गांव में बकरीद पर हर बार 6 से 7 बकरों की कुर्बानी की जाती थी। कुर्बानी करने का कोई गांव में विशेष स्थान नहीं है। लोग घरों में ही बकरे की कुर्बानी देते है। इस बार लोग बकरे की कुर्बानी नहीं दे रहे हैं। इस बार केवल ईद की नमाज पढेंग़े। यह निर्णय खुद लोगों ने लिया है।-हाजी दाउद, मौलाना बिसाहड़ा मस्जिद
बिसाहड़ा में एक प्लाटून पीएसी पहले से ही तैनात है। स्थानीय पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया है। गांव में पूर्णरूप से शांति है। - अभिषेक यादव, एसपी देहात गौतमबुद्ध नगर