-अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम से लौटे डीयू विद्यार्थियों से कुलपति ने किया सीधा संवाद
-विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर युवाओं से मांगे सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो योगेश सिंह ने कहा कि दिल्ली में बैठकर देश में गरीबी का सही अनुभव करना संभव नहीं है। विद्यार्थियों को देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर वहां के जीवन, संस्कृति और चुनौतियों को समझना चाहिए, तभी उन्हें भारत की वास्तविक तस्वीर का पता चलेगा। कुलपति ने यह बातें अष्ट लक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत मेघालय के आईआईएम शिलांग से लौटे डीयू के विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद करते हुए कही। इस अवसर पर कुलपति ने विद्यार्थियों के अनुभवों को सुना और उनसे विभिन्न विषयों पर सुझाव भी मांगे
कुलपति ने विद्यार्थियों से विकसित भारत 2047 के संकल्प को लेकर उनके विचार और सुझाव भी सुने। उन्होंने कहा कि अगले 20 वर्षों तक सरकार और देश का मुख्य ध्यान आर्थिक विकास और प्रगति पर केंद्रित रहना चाहिए। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाना आवश्यक है। प्रो योगेश सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि वे विकसित भारत के एम्बेसडर हैं और उन्हें यह भावना हमेशा बनाए रखनी चाहिए कि देश के सभी लोग उनके भाई-बहन हैं। हमें छोटे-छोटे व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर देश के व्यापक हित में काम करना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति प्राचीन काल से ही अत्यंत समृद्ध रही है और हमें अपनी प्राकृतिक जीवन शैली और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने की आवश्यकता है। इस अवसर पर दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो रजनी अब्बी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो रंजन कुमार त्रिपाठी और डीन अकादमिक प्रो के रत्नाबली सहित कई शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
एक से चौदह फरवरी तक हुए प्रोग्राम में डीयू के 20 विद्यार्थियों ने भाग लिया
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो रंजन कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अष्ट लक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के नौवें बैच का आयोजन 1 से 14 फरवरी 2026 तक आईआईएम शिलांग (मेघालय) में किया गया। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के 20 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जो भारत के 15 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं और डीयू के विभिन्न कॉलेजों और विभागों में अध्ययनरत हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन डेवलपमेंट ऑफ़ नॉर्थ ईस्टर्न रीजन मंत्रालय और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल के सहयोग से किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं में कल्चरल एक्सचेंज, एकेडमिक लर्निंग और नेशनल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने आईआईएम शिलांग और नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी में आयोजित अकादमिक सत्रों में भाग लिया। इन सत्रों में कैट की तैयारी, पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति और जैव विविधता, पर्यटन संभावनाएं तथा क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इसके अलावा विद्यार्थियों ने ईस्टर्न एयर कमांड, नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल, आईसीसीआर शिलांग, लोक भवन और आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स जैसी संस्थाओं का दौरा भी किया, जिससे उन्हें शासन व्यवस्था, रक्षा क्षेत्र और अनुसंधान से जुड़ी पहलों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।