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Delhi NCR News: पराली ही नहीं, धूल और कचरा भी बढ़ा रहे प्रदूषण

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79% ने निर्माण कार्यों को बताया हवा खराब होने की बड़ी वजह
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए अब केवल पराली का धुआं ही नहीं, बल्कि शहरों के भीतर चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों की धूल और खुले में जलाया जाने वाला कचरा भी बड़ी वजह बन रहे हैं। लोकलसर्कल्स के एक सर्वे में शामिल लोगों ने स्थानीय स्तर पर फैल रहे प्रदूषण पर चिंता जताई है। सर्वे के अनुसार, 79 प्रतिशत लोगों ने निर्माण कार्यों को हवा खराब होने की प्रमुख वजह बताया। वहीं, 64 प्रतिशत लोगों ने सड़कों की धूल और इतने ही लोगों ने खुले में कचरा जलाने को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार माना। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के 20 हजार से अधिक नागरिकों की राय पर आधारित इस सर्वे में सामने आया कि लोग अपने आसपास होने वाली गतिविधियों को भी प्रदूषण का बड़ा कारण मान रहे हैं। सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों ने पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने, 50 प्रतिशत ने औद्योगिक प्रदूषण और 36 प्रतिशत ने वाहनों से निकलने वाले धुएं को हवा खराब होने की वजह बताया। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, खुले में कचरा जलाने की दर्ज घटनाएं 2023 में 3,511 थीं, जो 2024 में बढ़कर 4,933 हो गईं। रिपोर्ट में दिल्ली में रोजाना 11 हजार से 14 हजार टन ठोस कचरा पैदा होने का भी उल्लेख है।
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पराली के साथ स्थानीय प्रदूषण पर भी ध्यान जरूरी: सर्दियों में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से उठने वाला धुआं दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रभावित करता है। हालांकि, सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों ने इसे प्रदूषण की वजह माना, जबकि निर्माण कार्यों, धूल और कचरा जलाने को भी बड़ी समस्या बताया। सर्वे से साफ है कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल पराली पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने, सड़कों की सफाई, कचरे का सही निस्तारण और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण जैसे कदम भी जरूरी हैं। स्थानीय स्तर पर इन समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई होने से दिल्ली-एनसीआर की हवा को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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