एशिया का सबसे सुरक्षित जेल तिहाड़ एक ना एक डरावनी कहानियों की वजह से चर्चा में बना हुआ है। तिहाड़ से कैदी भागने के मामले के बाद प्रशासनिक तौर पर चल रही लापरवाहियों की कड़ी सी सामने आ गई।
अब जो डरावना सच सामने आया है वो समलैंगिक यौन उत्पीड़न से जुड़ा हुआ है। तिहाड़ में यौन शोषण के पीड़ितों के मुंह ना खोलने की अपनी मजबूरी है तो वहीं दूसरी ओर तिहाड़ प्रशासन भी इन मामलों पर मौन नजर आता है।
पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर थाने के सूत्र की मानें तो प्रशासन इस तरह की घटनाओं को साझा भी नहीं करना चाहता। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो कई कड़वे सच सामने आते हैं। 2015 की दस मई को पुलिस थाने में एक पुरूष कैदी के साथ रेप का मामला दर्ज किया गया था।
आंकड़े बयां करते हैं डरावना सच
वहीं दूसरी ओर इसके मुकाबले पिछले साल सात मामले सामने आए थे। आंकड़े कहते हैं कि 2013, 2011 और 2010 वो साल रहे जिसमें तिहाड़ में एक भी रेप का मामला दर्ज नहीं है।
वहीं जेल के सूत्र कहते हैं कि तिहाड़ में रेप एक खौफनाक सच की तरह है। जिसपर कोई भी बात करने को भी तैयार नहीं होता। तिहाड़ जेल में सजा काट चुके एक कैदी के मुताबिक 'तिहाड़ में कई सुधार कार्यक्रम होते हैं, लेकिन उनका कोई असर नहीं होता।
रेप का ये सच उन लोगों के लिए ज्यादा भयानक है जो दूसरे कैदियों से खुद की रक्षा नहीं कर पाते।
आत्महत्या के मामलों के लिए जिम्मेदार है रेप
वहीं पुलिस उपमहानिरीक्षक जेल मुकेश प्रसाद कहते हैं कि तिहाड़ में समलिंगी रेप की घटनाएं होती हैं, लेकिन इनकी संख्या काफी कम है। जमानत पर रिहा एक कैदी जो हत्या के मामले में बंद है कहता है कि जेल में कई गैंग सक्रिय है।
प्रतिद्वंदी गैंग दूसरे गैंग से बदला लेने के लिए यौन शोषण भी करते हैं। तिहाड़ जेल की पूर्व महानिदेशक किरण बेदी कहते हैं कि जेल के अंदर इस तरह की वारदातों के लिए जेल प्रशासन जिम्मेदार है।
बेदी आगे कहती हैं कि तिहाड़ में रेप होते हैं, जेल के कैदियों में सीसीटीवी कैमरों का खौफ होना चाहिए। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट कहती है कि 2007 से 2011 के बीच रेप के मामलों की वजह से आत्महत्या के मामले बढ़े हैं।
स्टोरी साभार: एबीपी न्यूज